29.6 C
Mumbai
Thursday, June 25, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

कनाडा में खालिस्तानी नेटवर्क पर कड़ा विधिक शिकंजा: 18 जुलाई से लागू होगा ‘एंटी-हेट कानून’, CSIS रिपोर्ट में कनिष्क धमाके के लिए माना जिम्मेदार; पाक ISI को झटका

नई दिल्ली/ओटावा: भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनयिक और विधिक तनाव के बीच एक बहुत बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय सुरक्षा अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री के बीच नई दिल्ली में हुई हालिया उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत के बाद कनाडाई धरती पर भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक संगठनों (Khalistani Network) के लिए हालात अब पहले जैसे नहीं रहे।

कनाडा सरकार द्वारा उठाए जा रहे इन कड़े विधिक व प्रशासनिक कदमों से न सिर्फ इन चरमपंथी संगठनों की गतिविधियों पर लगाम लगी है, बल्कि इन्हें पालने-पोसने वाली पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के भारत विरोधी मंसूबों को भी गहरा रणनीतिक झटका लगा है।

1. 18 जुलाई से कड़ा ‘एंटी-हेट कानून’ (Anti-Hate Law) होगा प्रभावी

दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के बाद कनाडा सरकार ने अपने विधिक ढांचे में बड़ा सुधार करते हुए एक नया एंटी-हेट कानून (नफरत विरोधी अधिनियम) पारित किया है।

  • प्रभावी तिथि: यह नया विधिक कानून 18 जुलाई 2026 से पूरे कनाडा में आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा।
  • धार्मिक स्थलों को विधिक सुरक्षा: भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इस कानून का सबसे बड़ा असर उन खालिस्तानी तत्वों पर पड़ेगा जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) की आड़ लेकर लंबे समय से हिंदू मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के बाहर हिंसक प्रदर्शन करते आ रहे थे।
  • अधिकारों में वृद्धि: कनाडाई हिंदू समुदाय की शिकायतों के अनुसार, मंदिरों के बाहर जबरन भारत विरोधी व पीएम मोदी विरोधी नारे लिखे जाते थे और वांछित आतंकवादियों की तस्वीरें लगाई जाती थीं। नए कानून के तहत कनाडाई पुलिस और स्थानीय प्रशासन को ऐसी घृणास्पद गतिविधियों को रोकने और दोषियों को तत्काल विधिक हिरासत में लेने के व्यापक अधिकार मिलेंगे।

2. CSIS की रिपोर्ट: पहली बार खालिस्तानी चरमपंथियों पर सीधा विधिक दोष

इस विधिक बदलाव के बीच कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) की एक हालिया और बेहद महत्वपूर्ण रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है, जिसने ओटावा के रुख को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है:

  • ऐतिहासिक स्वीकारोक्ति: रिपोर्ट में 23 जून 1985 को हुए एयर इंडिया की कनिष्क फ्लाइट 182 (Kanishka Flight 182) बम धमाके के लिए स्पष्ट रूप से खालिस्तानी चरमपंथियों को विधिक व ऐतिहासिक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है।
  • आंतरिक सुरक्षा को खतरा: भारतीय सुरक्षा तंत्र का विश्लेषण है कि हाल के वर्षों में यह पहली बार है जब कनाडाई खुफिया एजेंसी ने इतने साफ शब्दों में इस जघन्य आतंकवादी हमले के पीछे खालिस्तानी आतंकियों की भूमिका को स्वीकार किया है। कनाडा अब यह विधिक व व्यावहारिक रूप से समझ चुका है कि ये उग्रवादी तत्व केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि खुद कनाडा की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा ‘भस्मासुर’ साबित हो रहे हैं।

पाकिस्तान की ISI और ‘बब्बर खालसा’ पर बढ़ा भारी विधिक दबाव
भारत की इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारत और कनाडा के बीच बढ़ते इस विधिक व सुरक्षा सहयोग से पाकिस्तान की रावलपिंडी स्थित खुफिया एजेंसी ISI गहरे असमंजस और परेशानी में है। ISI लंबे समय से कनाडा और यूरोप की धरती का इस्तेमाल कर भारत के पंजाब में अशांति फैलाने का विधिक व वित्तीय ताना-बाना बुनती रही है।

वर्तमान में बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों पर कनाडाई एजेंसियों का भारी दबाव है, जिन्हें पंजाब में आतंकी मॉड्यूल सक्रिय करने का काम सौंपा गया था।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट: ‘लो-इंटेंसिटी’ हमलों की आशंका

यद्यपि भारतीय और कनाडाई सुरक्षा एजेंसियां इस विधिक मुस्तैदी को एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता मान रही हैं, लेकिन साथ ही अलर्ट मोड पर भी हैं। खुफिया विशेषज्ञों का विधिक आकलन है कि जब किसी वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क पर चौतरफा दबाव बढ़ता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए बौखलाहट में अधिक आक्रामक या आत्मघाती कदम उठा सकता है।

वर्तमान में कनाडा और पंजाब में देखने को मिल रहे छोटे और कम तीव्रता वाले (Low-Intensity) छिटपुट हमले इसी हताशा का परिणाम हैं, जिसे ये संगठन अपने दम तोड़ते आंदोलन को जीवित रखने की आखिरी विधिक व व्यावहारिक रणनीति के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here