28.7 C
Mumbai
Thursday, July 9, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

सिक्किम के सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने गृह सचिव से की मुलाकात: भारत-नेपाल सीमा पर रणनीतिक सड़क, SSB जवानों के भत्ते और लिम्बू-तामांग सीट आरक्षण का मुद्दा उठाया

नई दिल्ली: सिक्किम से लोकसभा सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने बुधवार (8 जुलाई 2026) को देश की राजधानी नई दिल्ली में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से एक महत्वपूर्ण विधिक व रणनीतिक मुलाकात की। इस बैठक के दौरान सांसद ने सिक्किम की भौगोलिक संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा और राज्य के जनजातीय समुदायों के लंबे समय से लंबित संवैधानिक अधिकारों से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दों पर गृह मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

1. भारत-नेपाल सीमा पर सर्व-मौसम रणनीतिक सड़क की मांग

सांसद सुब्बा ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया:

  • रणनीतिक महत्व: सिक्किम की भारत-नेपाल सीमा सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। दुर्गम और पहाड़ी रास्तों के कारण यहां त्वरित सैन्य आवाजाही में कठिनाई होती है।
  • प्रस्तावित सड़क परियोजना: उन्होंने सीमा चौकी नांबू से सीमा स्तंभ संख्या 34/1 होते हुए सीमा चौकी हांसपोखरी तक प्रस्तावित सर्व-मौसम (All-Weather) सड़क परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने का विधिक अनुरोध किया। इससे सीमा सुरक्षा बलों की रसद आपूर्ति और परिचालन क्षमता (Operational Capability) में इजाफा होगा।

2. SSB की 36वीं और 72वीं बटालियन के लिए विशेष भत्ता

उच्च हिमालयी और ग्लेशियर वाले क्षेत्रों में तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों के कल्याण का मुद्दा उठाते हुए सांसद ने कहा:

  • कठिन परिस्थितियां: इन इलाकों में तैनात जवान अत्यंत प्रतिकूल मौसम और शून्य से नीचे के तापमान में देश की रक्षा कर रहे हैं।
  • जोखिम एवं कठिनाई भत्ता: सांसद ने इन दुर्गम मोर्चों पर तैनात एसएसबी की 36वीं और 72वीं बटालियन के जवानों को R1H1 (Risk and Hardship Allowance) श्रेणी के तहत विशेष भत्ता प्रदान करने की विधिक व प्रशासनिक मांग की।

3. लिम्बू और तामांग समुदायों के लिए विधानसभा सीटों का आरक्षण

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा सिक्किम विधानसभा में सीटों के विधिक पुनर्गठन से जुड़ा था, जिसका विवरण इस प्रकार है:

$$\text{लिम्बू-तामांग आरक्षण मुद्दा} \begin{cases} \text{संवैधानिक दर्जा:} & \text{वर्ष **2003** में ही दोनों समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल किया गया था।} \\ \text{लंबित मांग:} & \text{दर्जा मिलने के **23 वर्षों** बाद भी सिक्किम विधानसभा में उनके लिए आरक्षित सीटें तय नहीं हुईं।} \\ \text{राजनीतिक प्रभाव:} & \text{यह पिछले दो दशकों से सिक्किम की राजनीति और सामाजिक न्याय का सबसे बड़ा संवैधानिक विमर्श है।} \\ \text{गृह मंत्रालय का रुख:} & \text{गृह सचिव गोविंद मोहन ने इन मुद्दों को गंभीरता से सुना और विधिक प्रगति का आश्वासन दिया।} \end{cases}$$

गृह मंत्रालय का आश्वासन
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह सचिव ने सांसद इंद्र हांग सुब्बा द्वारा उठाए गए सभी विधिक और सुरक्षा संबंधी बिंदुओं को नोट किया है और संबंधित विभागों के साथ इस पर त्वरित समीक्षा बैठक करने का भरोसा दिया है। सांसद ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के साथ-साथ सिक्किम के जनजातीय समाज को उनका विधिक प्रतिनिधित्व देकर इस दो दशक पुराने गतिरोध को जल्द समाप्त करेगी।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here