नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के उग्र विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से खदेड़ दिया है। इस दौरान हुई हिंसक झड़प में पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 50 से ज्यादा जवान घायल हो गए हैं। पुलिस ने कई दर्जन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। वहीं, सीजेपी ने भी आरोप लगाया है कि पुलिसिया कार्रवाई में उनके कई कार्यकर्ताओं को गंभीर चोटें आई हैं। अब दिल्ली पुलिस इस पूरे घटनाक्रम के पीछे छिपे ‘सफेदपोशों’ और मास्टरमाइंड का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और वॉट्सऐप चैट खंगालने में जुट गई है।
सुनियोजित साजिश और व्हाट्सएप मैसेज पर टिकी पुलिस की नजर
दिल्ली पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को एक सोची-समझी साजिश के तहत उकसाया गया था। पुलिस जांच में निम्नलिखित अहम बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है:
- व्हाट्सएप और कॉल डिटेल की जांच: सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के पास कुछ रसूखदार ‘सफेदपोश’ लोगों के मोबाइल से निर्देश और व्हाट्सएप मैसेज आ रहे थे। पुलिस इन संदेशों के स्रोत का पता लगाने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है।
- डिजिटल सबूतों का विश्लेषण: नई दिल्ली क्षेत्र, मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में लगे सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है। इसके अलावा, पुलिस द्वारा बनाए गए मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए दंगाइयों और उन्हें उकसाने वालों की पहचान की जा रही है।
अप्रत्याशित पथराव और पत्थरों से भरा ट्रक बरामद
लुटियन दिल्ली और संसद भवन के आसपास का क्षेत्र बेहद वीआईपी माना जाता है, जहां आसानी से ईंट-पत्थर उपलब्ध नहीं होते। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए भारी पथराव ने पुलिस को चौंका दिया है।
जांच का बड़ा सुराग: पुलिस को जंतर-मंतर के पास पत्थरों से भरा एक संदिग्ध ट्रक खड़ा मिला है। इससे यह साफ होता है कि पुलिस पर हमला करने और हिंसा भड़काने की तैयारी पहले से ही की गई थी।
राजनीतिक दलों के नेताओं पर पुलिस का शक
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मार्च को असंगठित दिखाने की कोशिश की गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों का छोटे-छोटे समूहों में मेट्रो के जरिए जंतर-मंतर पहुंचना और फिर संसद भवन तक का रास्ता तय करना एक बेहद सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था। पुलिस को शक है कि कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने खास कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रदर्शनकारियों तक संदेश पहुंचाए और इस उग्र मार्च को पर्दे के पीछे से मैनेज किया। फिलहाल पुलिस इस बड़ी साजिश की तह तक जाने के लिए सभी कड़ियों को जोड़ रही है।

