नई दिल्ली: हवाई किराये में लगातार हो रही बढ़ोतरी और यात्रियों की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को मजबूत कर दिया है। घरेलू एयरलाइनों के किरायों पर पैनी नजर रखने के लिए डीजीसीए (DGCA) की टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट काम कर रही है। इसके साथ ही, मनमाने किराये से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ‘एयर सेवा’ (Air Sewa) प्लेटफॉर्म पर एक नया ‘एयर फेयर मॉड्यूल’ शुरू किया गया है।
एयरलाइंस खुद तय करती हैं किराया
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, मार्च 1994 में वायु निगम अधिनियम (Air Corporations Act) के निरस्त होने के बाद भारत का घरेलू विमानन क्षेत्र पूरी तरह से डि-रेगुलेट (नियंत्रण मुक्त) हो गया था। इसके तहत एयरलाइन कंपनियां अपनी परिचालन लागत, मांग, उड़ानों के रूट और व्यावसायिक संभावनाओं के आधार पर खुद किराया तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, कंपनियों को रूट डिस्पर्सल गाइडलाइंस और एयरपोर्ट स्लॉट नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
असाधारण परिस्थितियों में ही होता है सरकारी हस्तक्षेप
संसद में जानकारी देते हुए मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सरकार आमतौर पर हवाई किराया तय नहीं करती, लेकिन आपातकालीन स्थितियों में हस्तक्षेप का अधिकार रखती है।
- कब-कब हुआ हस्तक्षेप? कोविड-19 महामारी, महाकुंभ, पहलगाम घटना और इंडिगो उड़ानों में तकनीकी बाधाओं के समय सरकार ने यात्रियों को राहत देने के लिए किरायों की ऊपरी सीमा (Cap) तय की थी और उड़ानों की संख्या बढ़ाई थी।
- 78 मुख्य रूटों पर नजर: DGCA की टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट हर महीने देश के 78 चुनिंदा हवाई मार्गों पर एयरलाइनों द्वारा अपनी वेबसाइटों पर घोषित किरायों का विश्लेषण करती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे तय सीमा से अधिक राशि न वसूलें।
CCI की भूमिका
विमानन बाजार में किसी भी कंपनी द्वारा एकाधिकार स्थापित करने या प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की है। सीसीआई बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए काम करता है।

