शैक्षणिक संस्थानों की मंजूरी के लिए घूस देने का दावा, पूर्व मंत्री अनबिल महेश ने जांच की उठाई मांग
चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को उस समय राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया जब वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन ने दावा किया कि पिछली द्रमुक सरकार के कार्यकाल में उन्हें अपने शिक्षण संस्थानों की अनुमति हासिल करने के लिए रिश्वत देने पर मजबूर किया गया था। सत्तारूढ़ टीवीके नेता विल्सन ने खुद को इस मामले का प्रत्यक्ष गवाह और सबूत बताते हुए कहा कि चेन्नई के टी नगर स्थित संस्थानों के लिए उनसे बड़ी रकम वसूली गई थी।
विल्सन ने सदन में चुनौती देते हुए कहा कि वे इस मामले में किसी भी प्रकार की जांच अथवा मानहानि के मुकदमे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
द्रमुक ने आरोपों को बताया बेबुनियाद और बदले की भावना द्रमुक नेता और पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे व्यक्तिगत रंजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा वित्त मंत्री खुद सदन में रिश्वत देने की बात कबूल कर रहे हैं, तो भ्रष्टाचार निरोधक और निगरानी निदेशालय (डीवीएसी) को तुरंत उन्हें तलब कर पूछताछ करनी चाहिए और साक्ष्य जुटाने चाहिए।
स्कूल की जांच और कैपिटेशन फीस के आरोप पोय्यामोझी ने दावा किया कि पल्लावरम में विल्सन द्वारा संचालित स्कूल के खिलाफ अनाधिकृत दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर पूर्व में कार्रवाई की गई थी, जिससे नाराज होकर वे ऐसे आरोप लगा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने विल्सन के कॉलेजों में छात्रों से कैपिटेशन फीस लेने का भी आरोप लगाया। इस तीखी राजनीतिक तकरार के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच एजेंसियां इन आरोपों की औपचारिक पड़ताल शुरू करेंगी।

