दो सदियों से अनसुलझे रहस्य पर नया शोध, विशेषज्ञों द्वारा औपचारिक पुष्टि और समीक्षा होना बाकी
सैन फ्रांसिस्को: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र से गणित और विज्ञान जगत को चौंकाने वाला एक बड़ा दावा सामने आया है। प्रमुख अनुसंधान कंपनी ओपनएआई ने दावा किया है कि उसके एआई सिस्टम ने गणित की सबसे जटिल और चर्चित ‘नेवियर-स्टोक्स’ (Navier-Stokes) समस्या का समाधान खोज लिया है। यह समस्या क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट द्वारा घोषित दुनिया की सात प्रतिष्ठित ‘मिलेनियम प्राइज प्रॉब्लम्स’ में शामिल है, जिसके सटीक समाधान के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 8.3 करोड़ रुपये) का पुरस्कार निर्धारित है। हालांकि, प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ की रिपोर्ट के अनुसार, इसे अभी अंतिम गणितीय समाधान नहीं माना गया है और विशेषज्ञों द्वारा शोधपत्र के औपचारिक मूल्यांकन व पुष्टि की प्रक्रिया जारी है।
क्या है नेवियर-स्टोक्स समीकरण और इसका महत्व? नेवियर-स्टोक्स समीकरणों का उपयोग पानी, हवा और अन्य तरल पदार्थों (द्रवों) की गतिशीलता को गणितीय रूप से समझने के लिए किया जाता है। मौसम के पूर्वानुमान, विमानन (एरोस्पेस), समुद्र विज्ञान और कई जटिल इंजीनियरिंग क्षेत्रों में इन समीकरणों का व्यापक उपयोग होता है। द्रव यांत्रिकी को समझने की रीढ़ होने के बावजूद, पिछले करीब दो सौ वर्षों से दुनिया भर के गणितज्ञ इसके एक बुनियादी सैद्धांतिक सवाल का अंतिम उत्तर खोजने में जुटे हुए हैं।
विलक्षणता (सिंगुलैरिटी) की पहेली पर टिकी है नजर इस समस्या का मुख्य बिंदु यह है कि यदि किसी द्रव की गति शुरुआत में पूरी तरह सुचारु और सामान्य हो, तो क्या वह सदैव वैसी ही बनी रहेगी या कुछ विशेष परिस्थितियों में उसमें ऐसी ‘विलक्षणता’ (सिंगुलैरिटी) पैदा हो सकती है, जहां समीकरण का मान सीमित समय में अनंत हो जाए। ओपनएआई का दावा इसी सदियों पुरानी पहेली को सुलझाने से जुड़ा है। यदि अंतरराष्ट्रीय गणितीय समुदाय और सहकर्मी समीक्षा (पीयर रिव्यू) में यह दावा सही प्रमाणित होता है, तो यह विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इतिहास में एक युगांतरकारी उपलब्धि दर्ज करेगा।

