नेहरू के बयान और नूरानी की किताब का दिया था हवाला, विश्व हिंदू परिषद ने किया तीखा पलटवार
नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी द्वारा हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर दिए गए एक बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में नया विवाद छिड़ गया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अंसारी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के दशकों पुराने वक्तव्य का हवाला दिए जाने पर दक्षिणपंथी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने पूर्व उपराष्ट्रपति के इस बयान पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए इसे बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को आहत करने वाला और संकीर्ण मानसिकता से प्रेरित करार दिया है।
नेहरू के कथन और एजी नूरानी की पुस्तक का किया था उल्लेख
जानकारी के अनुसार, शनिवार को इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक विशेष विचार गोष्ठी में बोलते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के उस पुराने ऐतिहासिक कथन का संदर्भ दिया था, जिसमें नेहरू ने कहा था कि स्वतंत्र भारत के अस्तित्व के लिए असली खतरा साम्यवाद से नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अंसारी ने प्रसिद्ध लेखक व संविधान विशेषज्ञ एजी नूरानी की वर्ष 2019 में प्रकाशित चर्चित पुस्तक ‘द आरएसएस: ए मेनेस टू इंडिया’ का भी विशेष रूप से उल्लेख किया और देश की मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की।
वीएचपी प्रवक्ता ने दी हिंदू विरोधी मानसिकता से बाहर आने की सलाह
अंसारी के इस वक्तव्य पर तुरंत पलटवार करते हुए विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों में से एक पर लंबे समय तक आसीन रहने वाले व्यक्ति को ऐसा विभाजनकारी बयान शोभा नहीं देता। बंसल ने निशाना साधते हुए कहा कि बहुसंख्यक हिंदू समाज को देश के लिए खतरा बताने से पहले हामिद अंसारी को अपने पूरे सार्वजनिक जीवन और आचरण का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि अंसारी को अब ‘नेहरूवादी, जिन्नावादी और हिंदू विरोधी सोच’ से बाहर निकलकर राष्ट्र की वास्तविक सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना चाहिए।

