तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनाया फैसला, दिल्ली हाईकोर्ट के पुराने आदेश को दी गई थी चुनौती
नई दिल्ली: देश भर के चिड़ियाघरों में जानवरों के बाड़ों में लोगों द्वारा कूदकर आत्महत्या की कोशिशों को रोकने के लिए पुख्ता दिशानिर्देश जारी करने की मांग वाली जनहित याचिका को सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार करने के बाद स्पष्ट किया कि इस संबंध में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश में कोई त्रुटि नहीं पाई गई है।
यह अहम फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने सुनाया। पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर विस्तृत सुनवाई के बाद यह निर्णय पारित किया। दरअसल, याचिकाकर्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय के जुलाई 2020 के उस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें चिड़ियाघरों की सुरक्षा व्यवस्था और बाड़ों की बाउंड्री से संबंधित ऐसे ही व्यापक दिशा-निर्देश मांगने वाली याचिका को निरस्त कर दिया गया था।
याचिका में मांग की गई थी कि देशभर के सभी प्रमुख चिड़ियाघरों में वन्यजीवों के बाड़ों के चारों ओर विशेष सुरक्षा अवरोधक, जाल और तकनीकी निगरानी तंत्र अनिवार्य किए जाएं, ताकि कोई भी व्यक्ति हताशा या मानसिक अवसाद में आकर खतरनाक वन्यजीवों के बाड़ों में न कूद सके। हालांकि, शीर्ष अदालत की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के रुख को बरकरार रखते हुए इस याचिका को खारिज करने का आदेश दिया और मामले का औपचारिक निपटारा कर दिया।

