टीएमसी नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: चुनाव आयोग से मांगी अंतिम फैसले की समयसीमा
नई दिल्ली: अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के आधिकारिक नाम और पार्टी के पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर छिड़े कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग (ईसीआई) से स्पष्ट रुख तय करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने आयोग से पूछा है कि वह इस पूरे विवाद का अंतिम निपटारा कब तक कर सकता है और इसके लिए तय समयसीमा क्या होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दाखिल उस विशेष याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा टीएमसी के नाम और ‘फूल और घास’ वाले सिंबल को फ्रीज करने के फैसले को सीधे चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान अदालत की पीठ ने निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू से स्पष्ट रूप से पूछा कि विवाद के समाधान में कितना समय लगेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आयोग को व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले का समाधान जल्द निकालने के लिए आयोग को नियमित और निरंतर सुनवाई शुरू करनी चाहिए। पीठ ने टिप्पणी की कि चुनाव आयोग कुछ दिनों तक रोजाना दोनों पक्षों की दलीलें सुन सकता है और उन्हें अपने जरूरी सबूत, दस्तावेज व साक्ष्य पेश करने का पूरा अवसर देकर मामले का अंतिम निपटारा कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की है।
इससे पहले ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष जोरदार दलीलें रखते हुए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। सिब्बल ने कहा कि जब चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत का समय नजदीक था, ठीक उसी संवेदनशील मोड़ पर आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने का एकतरफा आदेश पारित कर दिया। उन्होंने दलील दी कि इस अप्रत्याशित कदम से उनके पक्ष के पास चुनावी मैदान में जाने और प्रभावी विधिक राहत पाने का कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा। वरिष्ठ वकील ने इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पार्टी के हितों के विपरीत बताते हुए शीर्ष अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई।

