बिना बल प्रयोग के नियंत्रित की गई भीड़; आईबी इनपुट्स और अतीत के ट्रेंड्स के आधार पर तैयार हुई थी विशेष सुरक्षा रणनीति
नई दिल्ली: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को तत्काल रोकने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी का सियासी पारा चढ़ गया है। शुक्रवार को विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों और प्रमुख छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग स्थित ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। भारी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के चलते स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और ‘बल प्रयोग’ की नौबत नहीं आई।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, बीस जुलाई को हुए हिंसक प्रदर्शन के अनुभवों से सबक लेते हुए दिल्ली पुलिस ने इस बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक मार्गदर्शन और सलाह के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था का खाका तैयार किया था। इसके तहत विरोध-प्रदर्शनों के पुराने ट्रेंड्स का बेहद सूक्ष्मता से तकनीकी और मनोवैज्ञानिक अध्ययन किया गया। साथ ही, खुफिया एजेंसी (आईबी) से मिले सटीक इनपुट्स के आधार पर जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के संवेदनशील इलाकों के लिए एक बहुस्तरीय ‘एडवांस प्लानिंग’ लागू की गई, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सफलता मिली।
गृह मंत्रालय द्वारा तैयार की गई यह आधुनिक भीड़-नियंत्रण रणनीति केवल राष्ट्रीय राजधानी तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के मुंबई में हाल ही में संपन्न हुए ‘सीजेपी’ के प्रदर्शन के दौरान भी इसी पूर्व-नियोजित सुरक्षा ढांचे को सफलतापूर्वक लागू किया गया था। इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के अन्य सभी राज्यों के पुलिस बलों को भी आंतरिक सुरक्षा और विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए इसी आधुनिक मॉडल और अग्रिम विश्लेषण पर काम करने का स्पष्ट सुझाव भेजा है।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में आयोजित ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए आंतरिक सुरक्षा को राष्ट्रीय विकास का मूल आधार बताया था। उन्होंने रेखांकित किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को सिद्ध करने की पहली अनिवार्य शर्त सुदृढ़ आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था है। यदि देश को वैश्विक स्तर पर हर क्षेत्र में अग्रणी बनना है, तो सुरक्षा तंत्र को भविष्योन्मुखी बनाना होगा। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे आने वाले 15 से 20 वर्षों के संभावित सामाजिक और सुरक्षा ट्रेंड्स का पूर्वानुमान लगाकर यह तय करें कि भविष्य में किस प्रकार की चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं और उन्हें समय रहते निष्प्रभावी करने की ठोस रणनीति क्या होनी चाहिए।

