13 महीनों में चार छात्रों की आत्महत्या पर गहराया विवाद, कांग्रेस ने कैंपस में जातिगत भेदभाव का लगाया आरोप
मुंबई: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के दिवंगत छात्र साहिल वाकोडे और अनिकेत अंबोरे के परिजनों से मुलाकात की। इन दोनों छात्रों ने संस्थान के भीतर कथित मानसिक तनाव और दबाव के चलते आत्महत्या कर ली थी। राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें न्याय की लड़ाई में कांग्रेस पार्टी की ओर से पूरा समर्थन और सहयोग देने का आश्वासन दिया। परिजनों ने इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी भेंट कर अपनी पीड़ा साझा की।
पीड़ित छात्रों के माता-पिता के साथ इस मुलाकात में कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ भी मुख्य रूप से मौजूद रहीं। बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि परिजनों ने राहुल गांधी के साथ लगभग डेढ़ घंटे तक विस्तृत चर्चा की और अपने बच्चों के साथ संस्थान में घटी परिस्थितियों व घटनाओं की पूरी जानकारी दी। राहुल गांधी ने परिवारों को आश्वस्त किया कि वे इस दुख की घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और इस संवेदनशील मुद्दे को उचित मंचों पर उठाया जाएगा।
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने छात्र साहिल वाकोडे की मौत को स्पष्ट रूप से “संस्थागत हत्या” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आईआईटी बॉम्बे के कैंपस में जातिगत भेदभाव और दमघोंटू माहौल के कारण वंचित और हाशिए के वर्गों से आने वाले छात्रों को गंभीर मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संस्थान का आंतरिक प्रशासनिक तंत्र छात्रों की शिकायतों और उनकी मानसिक स्थिति को संभालने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है।
गायकवाड़ ने प्रीमियर शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और कल्याण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि पिछले मात्र 13 महीनों की अवधि में आईआईटी बॉम्बे के चार छात्रों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया है। इसके साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि अब तक इस प्रतिष्ठित संस्थान के कुल 14 छात्र अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके हैं, जो परिसर के भीतर व्याप्त गंभीर संकट की ओर स्पष्ट इशारा करता है।
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार और उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रशासन से परिसरों में जातिगत उत्पीड़न की रोकथाम के लिए तत्काल सख्त व प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि छात्रों को मानसिक संबल प्रदान करने और भेदभाव रहित सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक नीतिगत बदलाव किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य होनहार छात्र को ऐसे त्रासद अंत का शिकार न होना पड़े।

