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Sunday, June 7, 2026

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सीबीएसई डिजिटल कॉपियों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: राहुल गांधी ने 18 साल के सार्थक और निसर्ग को सराहा; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं की परीक्षाओं के मूल्यांकन (कॉपियों की जांच) को लेकर एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे मामले का सनसनीखेज भंडाफोड़ करने वाले 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत और उनके मित्र निसर्ग की जमकर तारीफ की है। इन दोनों छात्रों ने अपनी सूझबूझ से सीबीएसई और परीक्षा का तकनीकी काम देखने वाली निजी कंपनी कोएम्प्ट (COEMPT) के बीच चल रहे कथित संदिग्ध खेल व तकनीकी गड़बड़ियों को साक्ष्यों के साथ देश के सामने लाकर रख दिया है। राहुल गांधी ने इस खुलासे को देश के युवाओं की बहुत बड़ी नैतिक जीत और केंद्र सरकार की करारी हार बताया है।

बड़े-बड़े खोजी पत्रकार और टीवी चैनल जो नहीं देख पाए, वो सार्थक ने पकड़ा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्र सार्थक सिद्धांत ने सीबीएसई कक्षा 12 की कॉपियां जांचने वाले डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (On-Screen Marking System) में हो रही बहुत बड़ी और गंभीर गड़बड़ियों को तकनीकी रूप से पकड़ा था। उन्होंने उन सुरक्षा कमियों और लूपहोल्स (खामियों) को सबूतों के साथ उजागर किया, जिन्हें देश के बड़े-बड़े टीवी चैनल, मुख्यधारा के अखबार और नामचीन खोजी पत्रकार भी अब तक पकड़ने में पूरी तरह नाकाम रहे थे।

इस ऐतिहासिक खुलासे के बाद कांग्रेस पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि नीट के बाद अब सीबीएसई जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा प्रणाली में इतनी बड़ी धांधली और लापरवाही सामने आने के बाद भी शिक्षा मंत्री का अपने पद पर बने रहना सिर्फ और सिर्फ उनके कुर्सी के मोह को दर्शाता है, उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।

राहुल गांधी का सोशल मीडिया पर हमला: ‘सीबीआई से भी तेज निकले हमारे युवा’

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक लंबा और विस्तृत संदेश साझा करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा, “सार्थक की उम्र भले ही सिर्फ 18 साल है, लेकिन उनकी सोच, उनका हौसला और उनका नियम-अनुशासन किसी भी बड़े और समझदार इंसान से कहीं अधिक मजबूत है। सार्थक और निसर्ग ने वह ऐतिहासिक काम कर दिखाया है जो देश के बड़े-बड़े कॉरपोरेट मीडिया घराने नहीं कर पाए। इन दोनों बच्चों ने मिलकर सीबीएसई और कोएम्प्ट कंपनी के बीच की खतरनाक मिलीभगत को पूरे देश के सामने बेनकाब कर दिया है।”

प्रधानमंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया, “पीएम मोदी चाहते हैं कि देश के करोड़ों युवा सिर्फ सोशल मीडिया पर रील बनाने में व्यस्त रहें, पकौड़े तलते रहें, लेकिन रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से कोई जरूरी सवाल न पूछें। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि युवा देश के वास्तविक हालातों से अपनी आंखें पूरी तरह बंद रखें। लेकिन इन जागरूक और समझदार बच्चों ने चुप रहने के बजाय सीधे इस लचर व्यवस्था की आंख में आंख डालकर कड़े सवाल पूछे। उन्होंने सिर्फ सवाल ही नहीं उठाए, बल्कि खुद एक कुशल जांच एजेंसी की तरह गहन छानबीन करके सारे पुख्ता जवाब भी ढूंढ निकाले।” राहुल गांधी ने आगे तंज कसते हुए कहा कि देश के एक 18 साल के बच्चे ने निष्पक्ष जांच के मामले में केंद्र सरकार की ‘सीबीआई’ (CBI) जैसी बड़ी एजेंसी को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है।

विवाद के बीच सीबीएसई का बड़ा दावा- पोर्टल पर हुआ था ‘साइबर हमला’

इस देशव्यापी हंगामे और डिजिटल मूल्यांकन पर उठे गंभीर सवालों के बीच सीबीएसई (CBSE) ने भी एक बेहद चौंकाने वाला बयान जारी किया है। बोर्ड का आधिकारिक दावा है कि छात्रों की कॉपियों की दोबारा जांच (Re-evaluation) करने वाले उनके मुख्य कंप्यूटर पोर्टल पर एक बहुत बड़ा और सुनियोजित साइबर हमला (Cyber Attack) हुआ था।

बोर्ड के आईटी विशेषज्ञों के मुताबिक, इस हैकिंग और डेटा क्रेडेंशियल चुराने के प्रयास को समय रहते पूरी तरह नाकाम (Foiled) कर दिया गया था और छात्रों का डेटा पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, बोर्ड के इस स्पष्टीकरण के बावजूद, रक्षा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का कहना है कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की डिजिटल सुरक्षा और उसकी कंप्यूटर प्रणाली इतनी संवेदनशील होने के बावजूद हैकर्स के निशाने पर कैसे आ गई, यह एक बेहद गंभीर जांच का विषय है।

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