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Friday, June 19, 2026

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प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ सक्रिय: भारतीय मौसम विभाग ने की पुष्टि; मानसून पर मंडराया संकट, अब ‘सकारात्मक IOD’ पर टिकी उम्मीदें

नई दिल्ली: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश की कृषि और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली एक बेहद गंभीर और बड़ी मौसमी चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया है कि प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ (El Niño) की स्थिति पूरी तरह पैदा हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह संकट आने वाले दिनों में अभी और गहराएगा क्योंकि मौजूदा दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (South-West Monsoon) के आगे बढ़ने के साथ ही यह सिस्टम और ज्यादा मजबूत होने वाला है।

मौसम विभाग द्वारा जून 2026 के लिए जारी किए गए विशेष ‘हिंद महासागर द्विध्रुव’ (IOD) बुलेटिन में साफ कहा गया है कि समुद्र की सतह के तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का तापमान अब अल नीनो के तय मानक पैमाने को पार कर चुका है, जिससे मानसूनी हवाओं की सामान्य गति प्रभावित होने की आशंका है।

समुद्र से वायुमंडल तक असर; ‘निनो 3.4 सूचकांक’ ने तोड़ा रिकॉर्ड

मौसम वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अब महासागर के ऊपर चलने वाली हवाओं का रुख भी तेजी से बदल रहा है। वायुमंडल ने इस समुद्री असाधारण गर्मी पर अपना सीधा असर दिखाना शुरू कर दिया है। तकनीकी भाषा में इसका सीधा मतलब यह हुआ कि समुद्र और वायुमंडल का पूरा चक्र (Coupled Ocean-Atmosphere System) अब अल नीनो की गिरफ्त में आ चुका है।

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में केंद्रीय उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का पानी रिकॉर्ड स्तर पर गर्म हो गया है। मौसम विभाग के अत्याधुनिक ‘मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम’ (MMCFS) के नए सिमुलेशन मॉडल और अनुमानों के अनुसार, जैसे-जैसे यह मानसून सीजन आगे बढ़ेगा, अल नीनो का खतरा और खतरनाक रूप ले सकता है।

वैज्ञानिक इस पूरे सिस्टम की थर्मल निगरानी के लिए ‘निनो 3.4 सूचकांक’ (Niño 3.4 Index) का इस्तेमाल करते हैं। इस तीन महीने के रनिंग औसत सूचकांक में +0.5°C से अधिक की निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है, जिसे आधार मानकर ही भारत में अल नीनो के आगमन की ऑफिशियल घोषणा की गई है। इसके अतिरिक्त, समुद्र की गहराई (Sub-surface) में भी तापमान काफी ज्यादा बढ़ा हुआ है, जो आने वाले महीनों में सतह पर गर्मी को और फीड करेगा।

क्या है अल नीनो और भारतीय खेती पर इसका सीधा असर?

  • भौगोलिक परिभाषा: अल नीनो एक जटिल प्राकृतिक मौसमी घटना है, जिसके तहत भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Equatorial Pacific Ocean) की सतह का पानी सामान्य तापमान से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है।
  • कमजोर मानसून: भारतीय कृषि और मानसून के इतिहास के लिए इसे कभी भी शुभ संकेत नहीं माना जाता है। पिछले दशकों के आंकड़े गवाह हैं कि जब-जब प्रशांत महासागर में अल नीनो का प्रेजेंस मजबूत हुआ है, भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी और कमजोर पड़ गई है।
  • सूखे का खतरा: इसकी वजह से देश के कई कृषि प्रधान राज्यों में मानसूनी बारिश का औसत गिर जाता है, भीषण गर्मी पड़ती है और लंबे समय तक ड्राई स्पैल (सूखा) रहने की स्थिति बनती है, जिससे पूर्व में भीषण अकाल जैसे हालात भी पैदा हो चुके हैं। हालांकि, आईएमडी (IMD) का कहना है कि भारतीय मानसून केवल अल नीनो के भरोसे नहीं रहता, इस पर अन्य क्षेत्रीय मौसमी प्रणालियों का भी प्रभाव होता है।

जापान के अनुमान से जगी राहत की उम्मीद; क्या बचाएगा सकारात्मक IOD?

इस बड़े पर्यावरणीय संकट के बीच जापान की मौसम एजेंसी (JMA) के एक पूर्वानुमान ने भारत के किसानों के लिए राहत की एक उम्मीद जगाई है। जापानी एजेंसी ने 11 जून 2026 को ही अल नीनो की शुरुआत का एलान करते हुए एक सकारात्मक संभावना जताई है कि आगामी जुलाई के महीने में हिंद महासागर में एक ‘सकारात्मक इंडियन ओशन डिपोल’ (Positive IOD) विकसित हो सकता है।

यदि जुलाई में वास्तव में सकारात्मक IOD बनता है, तो यह भारत के लिए बहुत बड़ी जीवनदायिनी खुशखबरी होगी। यह समुद्री सिस्टम अल नीनो के नकारात्मक प्रभावों को पूरी तरह बेअसर (Counteract) करने की क्षमता रखता है और घाटी व मैदानी इलाकों में अच्छी मानसूनी बारिश कराने में मदद करता है।

हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का मौजूदा आकलन जापानी एजेंसी से थोड़ा भिन्न है। आईएमडी के मुताबिक, इस समय हिंद महासागर में पूरी तरह से ‘तटस्थ आईओडी’ (Neutral IOD) बना हुआ है और पूरे मानसून सीजन में इसके ऐसे ही न्यूट्रल रहने की उम्मीद है। इसका मतलब यह हुआ कि यह भारतीय मानसून को न तो अतिरिक्त सहयोग देगा और न ही नुकसान पहुंचाएगा। भारतीय वैज्ञानिक अब प्रशांत और हिंद महासागर के बदलते मिजाज और तापमान की हर पल सैटेलाइट के जरिए निगरानी कर रहे हैं।

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