‘लोक भवन’ के नाम पर फर्जी मुहर व हस्ताक्षर से 3AC के कन्फर्म टिकट कराते थे बुक; जांच में कई ट्रेन रूट आए सामने
मुंबई:
महाराष्ट्र के ‘लोक भवन’ (पूर्व में राजभवन) के आधिकारिक लेटरहेड, फर्जी मुहरों और सिफारिशी पत्रों का इस्तेमाल कर भारतीय रेलवे के इमरजेंसी कोटे (EQ) से कन्फर्म टिकट हासिल करने वाले एक बड़े फर्जीवाड़ा गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। मुंबई की मालाबार हिल पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, गिरफ्तार मुख्य आरोपी की पहचान अमरीश ठक्कर और उसके साथी शत्रुंजय राजकुमार यादव उर्फ अनूप (34) के रूप में हुई है। इनके साथ तीन रेलवे टिकट दलालों को भी गिरफ्तार किया गया है।
इस तरह किया जाता था फर्जीवाड़ा
पुलिस जांच में गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा हुआ है:
- फर्जी हस्ताक्षर व मुहर: आरोपी टिकट दलाल कन्फर्म 3AC (थर्ड एसी) टिकट पाने के लिए ‘लोक भवन’ के लेटरहेड पर राज्यपाल के तत्कालीन पर्सनल असिस्टेंट (PA) के फर्जी हस्ताक्षर और नकली मुहरों का इस्तेमाल करते थे।
- इमरजेंसी कोटा (EQ) का दुरुपयोग: ये सिफारिशी पत्र मध्य रेलवे (Central Railway) के कमर्शियल विभाग को भेजकर वीआईपी/इमरजेंसी कोटे के तहत कन्फर्म बर्थ हासिल कर लेते थे और बदले में यात्रियों से मोटी रकम वसूलते थे।
इस तरह पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
यह पूरा मामला तब सामने आया जब सेंट्रल रेलवे के चीफ कमर्शियल मैनेजर (CCM) कार्यालय ने बीते 6 फरवरी को रूटीन वेरिफिकेशन के लिए इमरजेंसी कोटे से जुड़े दो सिफारिशी पत्र लोक भवन (राजभवन) भेजे।
लोक भवन के अधिकृत अधिकारी विशाल सुधीर शिंदे द्वारा पत्रों की जांच करने पर पुष्टि हुई कि ये सिफारिशी पत्र राज्यपाल कार्यालय से जारी ही नहीं किए गए थे। इसके बाद शिंदे की शिकायत पर मालाबार हिल पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
फर्जी दस्तावेजों से इन ट्रेनों में बुक हुए टिकट
तकनीकी निगरानी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर हुई जांच में पाया गया कि:
- लोकेशन व ट्रेनें: गिरोह ने मुख्य रूप से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT)-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनों के टिकट बुक कराने के लिए इन फर्जी पत्रों का इस्तेमाल किया था।
- फर्जी मोबाइल नंबर: सिफारिशी पत्रों पर दर्ज कराए गए संपर्क नंबर भी जांच में फर्जी पाए गए।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में रेलवे के कोई कर्मचारी शामिल थे या नहीं, और इन्होंने अब तक कितने यात्रियों को फर्जी सिफारिशों पर कन्फर्म टिकट जारी करवाए हैं।

