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Friday, July 24, 2026

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महाराष्ट्र: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नीट और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली की सुनवाई के लिए बनेंगी दो विशेष अदालतें

मुंबई: देशभर में नीट-यूजी (NEET-UG) समेत विभिन्न सार्वजनिक परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और पेपर लीक विवाद के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अदालत ने महाराष्ट्र के नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में दो विशेष अदालतें (Special Courts) नामित की हैं। ये अदालतें प्रतियोगी और सरकारी परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल व पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करेंगी।

यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा में धांधली के मामलों के लिए ‘फास्ट-ट्रैक’ कोर्ट स्थापित करने के आश्वासन के ठीक एक दिन बाद आया है।

किन अदालतों को बनाया गया विशेष कोर्ट?

बॉम्बे हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए निम्नलिखित दो अदालतों को विशेष अदालत के रूप में नामित किया है:

  1. छत्रपति संभाजीनगर: अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एस. वी. पवार की अदालत।
  2. नागपुर: अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गुलशन कोल्टे की अदालत।

हाईकोर्ट सूत्रों के अनुसार, यह कदम केंद्र सरकार के उन निर्देशों के तहत उठाया गया है, जिनमें राज्यों के कम से कम दो प्रमुख जिलों में परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें गठित करने को कहा गया था।

3 महीने के भीतर पूरा करना होगा केस का ट्रायल

ये नामित विशेष अदालतें सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 [Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024] और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी।

  • समय सीमा: 2024 के इस कड़े कानून के तहत प्रावधान है कि परीक्षा में गड़बड़ी और धांधली से जुड़े मामलों का ट्रायल तीन महीने (90 दिन) के भीतर पूरा किया जाना अनिवार्य है।
  • उद्देश्य: मामलों का त्वरित निस्तारण करना और दोषियों को बिना किसी देरी के सख्त से सख्त सजा दिलाना, ताकि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता कायम हो सके।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच लिया गया फैसला

मई में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा के बाद सामने आए पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जून के अंत से छात्रों और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन जारी रहा है। छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यापक सुधार और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक कदम से आंदोलनरत छात्रों और अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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