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Thursday, June 18, 2026

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‘साइबर अपराधी परजीवी हैं, भोले-भाले निवेशकों को ठगने वालों से सख्ती से निपटना होगा’: सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी; FIR एक साथ जोड़ने की याचिका खारिज

नई दिल्ली: देश में लगातार बढ़ते डिजिटल और साइबर अपराधों पर देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद सख्त और कड़ा रुख अख्तियार किया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक मामले की सुनवाई के दौरान साइबर ठगों को समाज के लिए बेहद खतरनाक बताते हुए उन्हें ‘परजीवी’ (Parasites) की संज्ञा दी है। शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि साइबर अपराधी देश के भोले-भाले निवेशकों और आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई को धोखे से लूट रहे हैं, इसलिए कानून और न्यायपालिका को इनके साथ अत्यंत कठोरता से पेश आना होगा।

विभिन्न राज्यों की FIR एक साथ जोड़ने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

यह बेहद महत्वपूर्ण और तल्ख विधिक टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ की ओर से आई है। अदालत एक ऐसे आरोपी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने देश के अलग-अलग राज्यों में अपने खिलाफ दर्ज की गई कई प्राथमिकियों (FIRs) को कानूनी रूप से एक साथ जोड़ने (Club) की मांग की थी, ताकि उसे बार-बार अलग-अलग राज्यों की पुलिस और अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें।

सर्वोच्च अदालत ने मामले की गंभीरता और देशव्यापी वित्तीय धोखाधड़ी के पैटर्न को देखते हुए याचिकाकर्ता को किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया और उसकी याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को कोई विधिक राहत चाहिए, तो वह इसके लिए संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) का दरवाजा खटखटा सकता है।

‘तमिलनाडु से लेकर जम्मू-कश्मीर तक फैला है जाल; समाज हित में जेल में रहना जरूरी’
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा: “आप लोग (साइबर ठग) समाज के ऊपर एक परजीवी की तरह हैं, जो भोले-भाले निवेशकों का पैसा हड़पकर उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से तबाह कर देते हैं। ऐसे अपराधों के शिकार हमेशा आम और सीधे भारतीय नागरिक होते हैं। आपकी कार्यप्रणाली यह है कि आप पहले तमिलनाडु में किसी को धोखा देते हैं, फिर वहां से बचकर जम्मू-कश्मीर चले जाते हैं और फिर उत्तर-पूर्व (North-East) के राज्यों में नया जाल फैला देते हैं। ऐसे शातिर अपराधियों को सलाखों के पीछे रखना ही पूरे समाज के हित में होगा।”

बढ़ते साइबर फ्रॉड के बीच कोर्ट का कड़ा संदेश

विधिक विश्लेषकों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख देश की पुलिस, जांच एजेंसियों और निचली अदालतों के लिए एक बड़ा विधिक संदेश है कि वे साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में आरोपियों को आसानी से जमानत (Bail) न दें। अदालत ने माना कि चूंकि साइबर अपराध की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती और एक ही अपराधी देश के अलग-अलग कोनों में बैठे सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाता है, इसलिए उनकी सभी एफआईआर को एक साथ जोड़कर जांच को कमजोर नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद आने वाले समय में वित्तीय साइबर अपराधियों के खिलाफ विधिक शिकंजा और ज्यादा कसना तय है।

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