1 सितंबर से नए हॉस्टल में भेजा जाएगा; मानसिक तनाव, अंधविश्वास और भीड़भाड़ को बताया गया वजह
अमरावती:
महाराष्ट्र के अमरावती जिले के चिखलदरा तहसील स्थित डोमा सरकारी आदिवासी आश्रम स्कूल की करीब 600 छात्राओं के हॉस्टल छोड़ने के मामले में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। परिसर में नवनिर्मित अलग छात्रावास में छात्राओं को आगामी 1 सितंबर से स्थानांतरित किया जाएगा।
अतिरिक्त आदिवासी आयुक्त संदीप गोलैत ने बुधवार को बताया कि नए छात्रावास में सभी छात्राओं के रहने के लिए बंक बेड और पर्याप्त व्यवस्था की गई है, जिससे पुराने हॉस्टल में क्षमता से अधिक भीड़भाड़ की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
क्या था पूरा मामला और छात्राओं का व्यवहार?
मुंबई से 700 किलोमीटर दूर मेलघाट क्षेत्र के इस आवासीय स्कूल में कुल 810 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं:
- घटना की शुरुआत: 22 जुलाई को चार छात्राओं ने अचानक असामान्य व्यवहार करना शुरू किया, जिसमें वे लगातार रोने और हंसने लगीं।
- दहशत का माहौल: देखते ही देखते अन्य छात्राओं और स्थानीय महिलाओं में भी ऐसे मानसिक लक्षण दिखे, जिसके बाद “आत्मा का साया” होने की अफवाह फैल गई और करीब 600 छात्राएं डर के मारे अपने घर लौट गईं।
- विशेषज्ञों का हस्तक्षेप: महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्राओं व परिजनों की काउंसलिंग की और इसे मानसिक तनाव का परिणाम बताया।
मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट: अंधविश्वास और स्थानीय मान्यताएं
| कारण / स्थानीय मान्यता | रिपोर्ट में सामने आए प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| महुआ का पेड़ कटना | स्थानीय लोगों में अंधविश्वास था कि स्कूल परिसर में कटे महुआ के पेड़ पर आत्माओं का वास था, जो नाराज हो गईं। |
| मंदिर और जल निकासी | मान्यता थी कि स्कूल के पीछे स्थित कुलदेवता के मंदिर पर ड्रेनेज व्यवस्था के अतिक्रमण से देवता रुष्ट हो गए। |
| युवक की मौत की अफवाह | स्कूल के निकट खेत में हुई एक युवक की मृत्यु के बाद भूत-प्रेत की निराधार कहानियां फैलाई गईं। |
| वास्तविक कारण | मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अधिक भीड़भाड़, पढ़ाई का दबाव, तनाव और गहरे अंधविश्वास के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। |

