न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ करेगी विचार; दो महीने में मांगी गई थी जांच रिपोर्ट
नई दिल्ली: पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) से जुड़े नेताओं और व्यक्तियों पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा दिए गए जांच के निर्देश पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने की मांग को लेकर दायर पंजाब सरकार की विशेष अनुमति याचिका पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा।
उच्चतम न्यायालय की वाद सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ द्वारा इस संवेदनशील मामले की सुनवाई किए जाने की संभावना है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के उस कड़े फैसले को सीधे चुनौती दी है, जिसमें जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने को कहा गया था।
यह पूरा कानूनी विवाद अधिवक्ता निखिल सराफ की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ता ने आप सरकार से संबद्ध कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों और पदाधिकारियों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं व भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक दलीलों का संज्ञान लेते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच के आदेश पारित किए थे।
हाईकोर्ट के इस आदेश के तुरंत बाद पंजाब सरकार ने सोमवार को शीर्ष अदालत का रुख किया। राज्य सरकार की दलील है कि राज्य पुलिस और उसकी विशेष जांच एजेंसियां इस तरह के आरोपों की निष्पक्ष जांच करने में पूरी तरह सक्षम हैं और सीधे तौर पर सीबीआई को मामला सौंपना राज्य के अधिकार क्षेत्र में अनावश्यक हस्तक्षेप है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की इस अहम सुनवाई पर राजनीतिक और कानूनी विश्लेषकों की निगाहें टिकी रहेंगी।

