28 C
Mumbai
Tuesday, August 25, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक: दो वकीलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर लगी लगाम

जाली अवार्ड कॉपी से राहत लेने के आरोप में हाईकोर्ट ने दिए थे एफआईआर और लाइसेंस रद्द करने के निर्देश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें जमीन अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में अदालत को गुमराह करने और जाली दस्तावेज पेश करने के आरोप में दो वकीलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने वकील शिव कांत मिश्रा की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम राहत दी और मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर तय की है।

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया था कि वे वकील शिव कांत मिश्रा और कृष्ण कांत मिश्रा के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराएं और बार काउंसिल में उनके लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करें।

मुआवजे पर ब्याज बढ़ाने से जुड़ा है विवाद यह पूरा विवाद बरेली डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) द्वारा अधिग्रहित भूमि के मुआवजे पर ब्याज भुगतान से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने पाया था कि 26 अप्रैल 2016 के अवार्ड की टाइप्ड कॉपी में कथित तौर पर हेरफेर कर पहले साल 9 प्रतिशत और बाद में 15 प्रतिशत सालाना ब्याज की अतिरिक्त शर्त जोड़ी गई थी, जिसके आधार पर पूर्व में पक्ष में फैसला हासिल कर लिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक दी राहत बरेली डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इसे गंभीर धोखाधड़ी करार दिया था और पूर्व आदेश को रद्द कर दिया था। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के दंडात्मक निर्देशों पर रोक लगाए जाने से दोनों वकीलों को फौरी तौर पर बड़ी राहत मिल गई है। शीर्ष अदालत इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति पर 12 अक्टूबर को विचार करेगी।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here