नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ‘आरएसएस एट 100: सेवा, एकता और बलिदान की एक सदी’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना पवित्र गंगा से करते हुए राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान को सराहा।
आरएसएस के सिद्धांतों पर उपराष्ट्रपति के विचार
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सेवा, एकता और बलिदान के सिद्धांतों ने संघ की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उनके अनुसार, ‘सेवा’ समाज के प्रति निस्वार्थ समर्पण है, ‘एकता’ विविधता से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ती है, और ‘बलिदान’ यह याद दिलाता है कि मजबूत संस्थाएं कठिन परिश्रम से बनती हैं।
पीएम मोदी की यात्रा का विशेष उल्लेख
पुस्तक के एक अध्याय का जिक्र करते हुए राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक स्वयंसेवक से ‘प्रधान सेवक’ बनने तक की यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने शासन के केंद्र में हमेशा ‘सेवा’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत को सर्वोपरि रखा है, जो संघ की सोच को दर्शाता है।
सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का संदेश
कार्यक्रम में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का संदेश भी पढ़ा गया। उन्होंने लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक संगठन के बारे में फैली कई गलत धारणाओं को स्पष्ट करती है और इसके कम चर्चित पहलुओं को सामने लाती है।
गरिमामयी उपस्थिति में हुआ विमोचन
उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में आयोजित इस भव्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, लेखक श्याम जाजू और अनुपम त्रिवेदी समेत कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

