जनहित याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा—’क्रीमी लेयर का सिद्धांत केवल ओबीसी के लिए लागू, नीति बनाना कार्यपालिका का काम’
नई दिल्ली:केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण पर ‘क्रीमी लेयर’ (Creamy Layer) का सिद्धांत लागू नहीं होता। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल कर एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने और आय आधारित नई आरक्षण नीति बनाने की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं (PILs) का पुरजोर विरोध किया है।केंद्र सरकार के हलफनामे की मुख्य बातेंअशोक कुमार ठाकुर फैसले का हवाला: सरकार ने कहा कि संविधान पीठ के अशोक कुमार ठाकुर बनाम भारत संघ फैसले में साफ किया गया था कि क्रीमी लेयर का नियम केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) पर लागू होता है, न कि एससी और एसटी समुदायों पर।संसद का अनन्य अधिकार: हलफनामे में संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि एससी और एसटी की सूची में किसी जाति को शामिल करने या हटाने का अधिकार केवल संसद के पास है। राज्य सरकारें या अदालतें इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकतीं।न्यायिक क्षेत्राधिकार से बाहर: केंद्र ने कहा कि अदालतें कार्यपालिका को किसी विशेष तरीके से नीति बनाने का निर्देश नहीं दे सकतीं। आरक्षण नीति में बदलाव के लिए व्यापक सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों और गहन अध्ययन की आवश्यकता होती है।जनहित याचिकाओं को खारिज करने की मांगयाचिकाकर्तामांगकेंद्र सरकार का रुख / जवाबरामाशंकर प्रजापति व अन्यएससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करना।याचिकाएं भ्रामक और गैर-विचारणीय हैं; अनुच्छेद 32 के तहत स्वीकार्य नहीं।अश्विनी उपाध्यायआरक्षित वर्गों के भीतर आय आधारित प्राथमिकता (Means Test)।नौकरियों/शिक्षा को छोड़कर अन्य कल्याणकारी योजनाओं में आय आधारित पात्रता पहले से लागू है।केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इन याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध किया है, क्योंकि इनमें किसी भी मौलिक अधिकार के उल्लंघन का मामला नहीं बनता।

