मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) में अनियमितता का आरोप; जांच और एफआईआर तक न हटने का ऐलान
बेंगलुरु: कर्नाटक में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। कथित चुनावी धोखाधड़ी और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोपों को लेकर गुरुवार को कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार अपने कैबिनेट सहयोगियों और विधायकों के साथ राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वी. अन्बुकुमार के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस नेताओं का यह विरोध प्रदर्शन राज्य निर्वाचन तंत्र में कथित धांधली के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर शुरू हुआ है।
डी.के. शिवकुमार और सत्ताधारी दल के विधायकों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय परिसर में धरना देते हुए मांग की कि मतदाता सूची संशोधन के दौरान की गई कथित धोखाधड़ी के खिलाफ तुरंत औपचारिक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की जाए और मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। धरने के दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित तत्वों के खिलाफ जांच के औपचारिक आदेश जारी नहीं होते और एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तब तक वे और उनके सहयोगी धरने से पीछे नहीं हटेंगे।
गौरतलब है कि धरने की औपचारिक घोषणा करने और धरने पर बैठने से पूर्व डी.के. शिवकुमार ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अन्बुकुमार के साथ लगभग ढाई घंटे तक बंद कमरे में मैराथन बैठक की थी। इस बैठक के दौरान उन्होंने मतदाता सूची में मतदाताओं के नाम हटाने और फर्जी प्रविष्टियों से जुड़े कथित साक्ष्य व आपत्तियां आयोग के समक्ष प्रस्तुत कीं। हालांकि, बातचीत से संतुष्ट न होने और तत्काल कानूनी कार्रवाई का आश्वासन न मिलने के बाद उन्होंने अपने मंत्रियों व विधायकों के साथ सीईओ कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने का रास्ता चुना। इस घटनाक्रम के बाद राज्य में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दलों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।

