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Tuesday, August 4, 2026

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संसद की संयुक्त समिति ने दी ‘कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ को हरी झंडी

छोटे उल्लंघनों के लिए जेल की सजा हटाने और स्टार्टअप्स व OPC के लिए कॉम्प्लायंस नियम आसान बनाने की सिफारिश

नई दिल्ली:

संसद की संयुक्त समिति ने ‘कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ का समर्थन करते हुए अपनी रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश कर दी है। समिति ने देश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने में आसानी) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कंपनियों के छोटे-मोटे प्रक्रियागत उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर (डीक्रिमिनलाइज) करने और वित्तीय दंड तक सीमित रखने की सिफारिश की है।

इसके अलावा, छोटे कारोबारों, स्टार्टअप्स और वन पर्सन कंपनियों (OPC) के लिए अनुपालन के नियमों को सरल बनाने तथा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) प्रावधानों में राहत देने के महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।

मुख्य सिफारिशें और प्रस्तावित बदलाव

विषयसमिति के प्रमुख सुझाव / बदलाव
डीक्रिमिनलाइजेशनकम जोखिम वाले उल्लंघनों में जेल की जगह इन-हाउस एडजुडिकेशन से केवल आर्थिक दंड। धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों में आपराधिक कार्रवाई जारी रहेगी।
NFRA आदेश उल्लंघनराष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के आदेश न मानने पर जेल की सजा हटाने और 50,000 रुपये का निश्चित जुर्माना लगाने का सुझाव।
CSR नियमों में छूटछोटी कंपनियों को नकद की बजाय वस्तु या सेवाओं (In-kind) के रूप में सीएसआर योगदान की अनुमति देने की सिफारिश।
IFSC री-डोमिसाइलविदेशी कंपनियों को मूल देश में कंपनी बंद किए बिना भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में स्थानांतरित होने और विदेशी मुद्रा में शेयर पूंजी रखने की छूट।
डिजिटल गवर्नेंसहाइब्रिड और वर्चुअल शेयरधारक बैठकों तथा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की अनुमति, हालांकि साल में एक AGM भौतिक रूप से करना अनिवार्य होगा।

छोटी कंपनियों को राहत, सार्वजनिक कंपनियों के लिए ऑडिट अनिवार्य

समिति ने स्पष्ट किया है कि अनिवार्य वैधानिक (Statutory) ऑडिट से छूट केवल छोटी कंपनियों को ही दी जानी चाहिए, सार्वजनिक (Public) कंपनियों को नहीं।

समिति ने यह रिपोर्ट उद्योग जगत, स्टार्टअप्स, बैंकिंग संस्थानों और पूंजी बाजार के प्रतिनिधियों से प्राप्त 130 ज्ञापनों और 900 से अधिक सुझावों का गहन अध्ययन करने के बाद तैयार की है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय कॉरपोरेट तंत्र को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुकूल और निवेशकों के लिए अधिक सुगम बनाना है।

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