खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बढ़ते हमलों के बीच दौरा, लश्कर और जैश को संरक्षण मिलने के आरोप
पेशावर: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर स्थित कोर मुख्यालय के अपने हालिया दौरे के दौरान मुल्क से आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने का संकल्प दोहराया है। शीर्ष सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बल किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हैं। हालांकि, पाकिस्तानी सेना प्रमुख का यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारतीय खुफिया तंत्र के उन आकलन के बिल्कुल विपरीत नजर आता है, जिनमें सीमा पार आतंकी गतिविधियों को लगातार मिलने वाले आधिकारिक समर्थन की बात कही गई है।
भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़े इनपुट और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान एक तरफ आतंकवाद विरोधी अभियानों का ढोंग रचता है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक मंचों पर प्रतिबंधित खूंखार आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के शीर्ष कमांडरों व बुनियादी ढांचों को कथित रूप से सुरक्षित पनाहगाह और आधिकारिक संरक्षण देना जारी रखे हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेना प्रमुख का यह बयान अपनी आंतरिक विफलताओं पर पर्दा डालने और अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने की एक महज रणनीतिक बयानबाजी है।
उल्लेखनीय है कि आसिम मुनीर का यह कड़ा रुख ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान स्वयं गंभीर आंतरिक सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। अशांत बलूचिस्तान प्रांत और खैबर पख्तूनख्वा के कबाइली इलाकों में पाकिस्तानी प्रतिष्ठानों पर आतंकी हमलों में अप्रत्याशित तेजी आई है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) लगातार सैन्य चौकियों, काफिलों और सरकारी संपत्तियों को निशाना बना रहे हैं। इन बढ़ते घात लगाकर किए गए हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी संख्या में जनहानि और नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे वहां की सैन्य रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

