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Thursday, May 28, 2026

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दिल्ली गोल्फ क्लब को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: ऐतिहासिक स्मारकों के पास सीलिंग के आदेश पर 22 जुलाई तक रोक; ASI को फटकार

नई दिल्ली: देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने लुटियंस दिल्ली में स्थित प्रतिष्ठित ‘दिल्ली गोल्फ क्लब’ (Delhi Golf Club) को एक बड़ी और तात्कालिक राहत दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने क्लब परिसर और उसके आस-पास स्थित संरक्षित ऐतिहासिक स्मारकों के 100 मीटर के दायरे में आने वाली सभी संरचनाओं (Structures) को सील करने और वहां जारी गतिविधियों को रोकने के अपने पिछले सख्त आदेश पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है।

अदालत ने यह विशेष राहत आगामी 22 जुलाई 2026 तक के लिए बढ़ाई है, जिससे गोल्फ क्लब प्रशासन को अपनी बात और कानूनी सुझाव रखने का एक और मौका मिल गया है।

पीठ ने ‘विशेष असाधारण राहत’ के तहत रोकी कार्रवाई

यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने दिल्ली गोल्फ क्लब की ओर से पेश हुए देश के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की पुरजोर अपील पर सुनाया:

  • जवाब के लिए मांगा समय: कपिल सिब्बल ने अदालत से क्लब का विस्तृत पक्ष रखने, आधिकारिक जवाब दाखिल करने और स्मारकों के संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक सुझाव पेश करने के लिए कुछ अतिरिक्त समय देने की मांग की थी।
  • कार्रवाई स्थगित: सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वर्तमान में पिछले आदेश पर पूरी तरह से पुनर्विचार (Review) करने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं दिखता है। लेकिन, मामले की परिस्थितियों को देखते हुए और एक ‘असाधारण राहत’ के तौर पर सीलिंग की दंडात्मक कार्रवाई को अगली सुनवाई तक के लिए स्थगित किया जा रहा है।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का पिछला सख्त आदेश?

इससे ठीक एक दिन पहले (बुधवार को) हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गोल्फ क्लब के भीतर मौजूद ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि:

  1. ‘लाल बंगला’ के पास पाबंदी: दिल्ली गोल्फ क्लब के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक पास स्थित राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारक ‘लाल बंगला I और II’ के 100 मीटर के दायरे (No-Construction/No-Activity Zone) में आने वाली सभी व्यावसायिक और गैर-व्यावसायिक गतिविधियों को तुरंत बंद किया जाए।
  2. 9 अन्य संरचनाओं पर भी रोक: इसके साथ ही क्लब परिसर के अंदर ही मौजूद नौ अन्य ऐतिहासिक और प्राचीन संरचनाओं के 20 मीटर के दायरे में भी किसी भी प्रकार की मानवीय या खेल संबंधी गतिविधि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया गया था।

ऐतिहासिक स्मारकों की दुर्दशा पर भड़का कोर्ट; ASI महानिदेशक को समन

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों के रख-रखाव को लेकर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की:

अदालत की तल्ख टिप्पणी:

“देश में कई बहुमूल्य ऐतिहासिक स्मारकों की वर्तमान स्थिति बेहद जर्जर, खराब और चिंताजनक है। ऐसा प्रतीत होता है कि इन अमूल्य राष्ट्रीय धरोहरों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए जमीनी स्तर पर कोई पर्याप्त काम नहीं किया गया है।”

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) पर सवाल: कोर्ट ने स्मारकों की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी संभालने वाली संस्था एएसआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
  • निदेशक को व्यक्तिगत नोटिस: अदालत ने इस घोर लापरवाही को लेकर एएसआई (ASI) के महानिदेशक को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा गया है कि संरक्षित स्मारकों की देखरेख और उनके आस-पास हो रहे अतिक्रमणों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसके साथ ही, एएसआई महानिदेशक को 22 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अपना विस्तृत जवाब कोर्ट में दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

कैसे शुरू हुआ गोल्फ क्लब की सीलिंग का यह पूरा विवाद?

इस पूरे कानूनी मामले की जड़ें एक जनहित याचिका से जुड़ी हैं:

  • मूल याचिका: पर्यावरण और हेरिटेज कार्यकर्ता राजीव सूरी ने अदालत में एक याचिका दायर की थी, जिसमें दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी इलाके में स्थित लोदीकालीन प्रसिद्ध स्मारक ‘गुमटी ऑफ शेख अली’ पर हुए अवैध कब्जे और अतिक्रमण (Encroachment) का मुद्दा उठाया गया था।
  • कोर्ट कमिश्नर का सर्वे: इस मामले की सुनवाई के दौरान जब कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष आयुक्तों (Court Commissioners) की टीम ने दिल्ली गोल्फ क्लब परिसर का औचक निरीक्षण और तकनीकी सर्वे किया, तो वहां स्थित 10 प्राचीन संरचनाओं के संरक्षण और उनके नियमों के उल्लंघन को लेकर कई गंभीर खामियां और अवैध निर्माण सामने आए, जिसके बाद कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की।

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