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Sunday, November 8, 2026

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नई दिल्ली: 25 साल बाद पूर्व CRPF अधिकारी को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दिए 10 लाख का हर्जाना और बकाया वेतन देने के आदेश

नई दिल्ली: लगभग 25 वर्षों तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रकाश कुमार दीक्षित को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि उन्हें पूरा बकाया वेतन, संशोधित पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। इसके साथ ही अदालत ने लंबी कानूनी लड़ाई के लिए 10 लाख रुपये मुकदमे के खर्च (मुआवजे) के रूप में देने का भी आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही पर जताई नाराजगी

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों के लापरवाह रवैये और अदालती आदेशों को सही ढंग से लागू न करने के कारण एक अधिकारी का बेहतरीन करियर प्रभावित हुआ। पीठ ने माना कि अनुशासनात्मक कार्रवाई को जिस तरह से संभाला गया, उससे अधिकारी को लंबे समय तक आर्थिक व मानसिक नुकसान उठाना पड़ा।

क्या था पूरा मामला?

प्रकाश कुमार दीक्षित ने वर्ष 1986 में सीआरपीएफ में सहायक कमांडेंट के रूप में सेवा शुरू की थी। वर्ष 1995 में विभागीय जांच के बाद उन पर बिना मंजूरी प्रभार सौंपने और 420 दिनों तक अनुपस्थित रहने का आरोप लगाकर सेवा से हटा दिया गया था।

बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बर्खास्तगी को रद्द करते हुए केवल मामूली सजा देने की बात कही थी, जिसे वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। विवाद इस बात पर था कि मामूली सजा कब से लागू मानी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सजा 10 जुलाई 1995 से लागू मानी जाएगी और 1998 में समाप्त हो गई थी; अतः इसका इस्तेमाल बाद में पदोन्नति रोकने के लिए नहीं किया जा सकता।

क्या-क्या मिली राहत?

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रकाश कुमार दीक्षित को उनके बैच के अन्य अधिकारियों की तर्ज पर ही डिप्टी कमांडेंट के पद पर पदोन्नति, पूरा बकाया वेतन, वेतन वृद्धि और संशोधित पेंशन के लाभ दिए जाएं। हालांकि, अदालत ने उन्हें इंस्पेक्टर जनरल (IG) पद पर पदोन्नति देने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह उस पद के लिए निर्धारित आवश्यक पात्रता शर्तें पूरी नहीं करते थे।

भुगतान के लिए तय की गई समय-सीमा

अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि:

  • मुकदमे के खर्च के रूप में 10 लाख रुपये 2 महीने के भीतर दिए जाएं। तय समय पर भुगतान न होने पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
  • बकाया वेतन, संशोधित पेंशन और सभी सेवानिवृत्ति लाभों की प्रक्रिया 6 महीने के भीतर पूरी की जाए।

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