नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार (20 जुलाई 2026) को पनामा के अपने समकक्ष जेवियर मार्टिनेज आचा वास्केज का नई दिल्ली में गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रतिनिधिमंडल स्तर की इस उच्च-स्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने बदलते वैश्विक व्यापारिक और भू-राजनीतिक माहौल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को हर क्षेत्र में नई मजबूती देने की प्रतिबद्धता जताई।
UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का पुरजोर समर्थन
वार्ता के दौरान पनामा के विदेश मंत्री जेवियर वास्केज ने वैश्विक शासन व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र (UN) में व्यापक सुधारों की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था आज की दुनिया की वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती है, क्योंकि यह लगभग 80 वर्ष पहले बनी थी।
- भारत का हक: वास्केज ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और एक उभरती महाशक्ति है, इसलिए वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता का पूरी तरह हकदार है।
- क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: उन्होंने लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों को भी सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व देने की मांग की, ताकि परिषद अधिक संतुलित और प्रतिनिधिक बन सके। इसके साथ ही पनामा ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की सराहना की।
पनामा नहर तटस्थता संधि का सदस्य बने भारत
यह द्विपक्षीय बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब पनामा, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण पनामा नहर की अंतरराष्ट्रीय तटस्थ स्थिति को और मजबूत करने के लिए भारत को ‘पनामा नहर तटस्थता संधि’ से जोड़ने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।
विदेश मंत्री वास्केज ने स्पष्ट किया कि उनकी इस भारत यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य विदेश मंत्री जयशंकर के साथ इसी विषय पर चर्चा करना है। उन्होंने पनामा की संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर देते हुए कहा:
“पनामा भारत को अपना रणनीतिक साझेदार बनाकर पनामा नहर की पूर्ण तटस्थता सुनिश्चित करना चाहता है। बीते 25 वर्षों से पनामा के लोग इस नहर का संचालन पूरी दक्षता और जिम्मेदारी से कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि भारत इस संधि का सदस्य बने ताकि पूरी दुनिया इस नहर को पनामा की संप्रभु संपत्ति और एक सम्मानित अंतरराष्ट्रीय धरोहर के रूप में स्वीकार करे।”
‘पनामा है भारत का अहम साझेदार’
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पनामा के विदेश मंत्री को पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित 5वीं भारत-एसआईसीए (SICA) विदेश मंत्रियों की बैठक की संयुक्त सह-अध्यक्षता की याद दिलाई।
जयशंकर ने कहा कि तीन वर्ष पहले (2023 में) हुई उनकी पनामा यात्रा के बाद से दोनों देशों के रिश्ते लगातार प्रगाढ़ हुए हैं। उन्होंने कहा कि पनामा की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, आर्थिक स्थिरता और विकास की अपार संभावनाएं उसे लैटिन अमेरिका में भारत का एक बेहद महत्वपूर्ण साझेदार बनाती हैं और भारत इस साझेदारी को हर क्षेत्र में और गहरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

