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Friday, September 4, 2026

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विदेशी चंदा कानून पर बनी 31 सदस्यीय JPC: भाजपा सांसद संजय जायसवाल बने अध्यक्ष, दोनों सदनों के सांसद शामिल

विदेशी अंशदान नियमन संशोधन विधेयक की होगी विस्तृत समीक्षा, लोकसभा सचिवालय ने जारी किया आधिकारिक बुलेटिन

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 की व्यापक समीक्षा और जांच के लिए संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन कर दिया गया है। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत बिहार के बेतिया से भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद डॉ. संजय जायसवाल को इस महत्वपूर्ण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

यह संयुक्त समिति दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के सांसदों को मिलाकर गठित की गई है, जो प्रस्तावित कानून के विभिन्न वैधानिक, वित्तीय और प्रशासनिक प्रावधानों का गहन अध्ययन करेगी।

लोकसभा से 21 सदस्यों का मनोनयन सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, समिति में निचले सदन से अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल सहित कुल 21 सांसदों को स्थान दिया गया है। इनमें प्रमुख रूप से भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, कमलेश जांगड़े, मुकेशकुमार चंद्रकांत दलाल, निशिकांत दुबे, विष्णु दयाल राम, अनंत नायक, अरविंद धर्मपुरी, एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस, मोहम्मद हमदुल्ला सईद, कालीचरण मुंडा, जिया उर रहमान, कल्याण बनर्जी, ए. राजा, लावू श्रीकृष्ण देवरायालु, नरेश गणपत म्हासके, कौशलेन्द्र कुमार, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

राज्यसभा के सदस्यों की भागीदारी समिति में उच्च सदन राज्यसभा से भी प्रमुख सदस्यों को नामित किया गया है। इनमें सी. सदानंदन मास्टर, हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल देवराव निकम और अलका गुर्जर प्रमुख रूप से शामिल हैं। दोनों सदनों के संयुक्त प्रतिनिधित्व वाली यह समिति विदेशी अंशदान विनियमन कानून से जुड़े विभिन्न पक्षों, गैर-सरकारी संगठनों और विशेषज्ञों के साथ विमर्श करेगी।

विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता पर रहेगा फोकस विदेशी अंशदान (विनियमन) कानून देश में गैर-सरकारी संगठनों और संस्थाओं को मिलने वाले विदेशी फंड के उपयोग को नियंत्रित और पारदर्शी बनाने के लिए लागू है। प्रस्तावित संशोधन विधेयक के जरिए विदेशी धन की निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। गठित संयुक्त समिति इस विधेयक के सभी पहलुओं का दीर्घकालिक प्रभाव के आधार पर परीक्षण कर अपनी सिफारिशें संसद के पटल पर रखेगी।

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