मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP – अजित पवार गुट) के भीतर एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी संकट खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के निर्वाचन को पार्टी के ही एक बेहद वरिष्ठ नेता ने अदालत के दरवाजे पर लाकर खड़ा कर दिया है।
पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने एक कानूनी नोटिस भेजकर सुनेत्रा पवार के चुनाव को पूरी तरह से ‘असंवैधानिक’ और पार्टी के नियमों के खिलाफ बताया है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली की एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म के माध्यम से 9 जुलाई को भेजे गए इस कानूनी नोटिस ने पार्टी के भीतर हड़कंप मचा दिया है। नोटिस में सीधे तौर पर 26 फरवरी को हुई चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
- पार्टी संविधान का उल्लंघन: नोटिस में दावा किया गया है कि 26 फरवरी को हुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एनसीपी के आधिकारिक संविधान और स्थापित नियमों के अनुसार नहीं कराया गया था।
- चुनाव रद्द करने की मांग: सच्चिदानंद सिंह ने मांग की है कि नियमों की अनदेखी कर किए गए इस चुनाव को तत्काल प्रभाव से रद्द (Null and Void) घोषित किया जाए।
- नए सिरे से चुनाव की मांग: संगठन में पारदर्शिता बहाल करने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से नए सिरे से राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराने की मांग की गई है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर इसका क्या असर होगा?
लोकसभा चुनाव के बाद और आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया यह विवाद अजित पवार गुट के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। सुनेत्रा पवार (जो उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी भी हैं) को अध्यक्ष पद से हटाए जाने या इस प्रक्रिया पर कानूनी रोक लगने से पार्टी की साख पर असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि: “यदि यह आंतरिक विवाद जल्दी नहीं सुलझा, तो मामला एक बार फिर चुनाव आयोग (Election Commission) के पास जा सकता है, जिससे संगठन के भीतर का असंतोष सड़कों पर आ जाएगा।”
आगे क्या?
इस कानूनी नोटिस के बाद अब सबकी निगाहें अजित पवार और सुनेत्रा पवार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या पार्टी इस आंतरिक संकट को आपसी बातचीत से सुलझा लेगी, या यह एनसीपी के एक और विभाजन या कानूनी लड़ाई की शुरुआत है? यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।

