कोलकाता/नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार की उस विवादास्पद नीति पर गहरी चिंता और कड़ा विरोध जताया है, जिसके तहत सरकारी सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के लाभ को सीधे राज्य की मतदाता सूची (Voter List) से जोड़ा जा रहा है। ओवैसी ने शनिवार (6 जून 2026) को सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से जिन वास्तविक नागरिकों के नाम मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं, उन्हें अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले जरूरी राशन और अन्य बुनियादी लाभों से दुर्भावनापूर्ण तरीके से वंचित किया जा रहा है।
वोटर लिस्ट से बाहर लोगों का राशन रोकना अन्याय: ओवैसी
सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के जरिए बंगाल सरकार को घेरते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “पश्चिम बंगाल सरकार ने जन कल्याणकारी लाभों को मतदाता सूची की कसौटी पर ला दिया है। इसके चलते एसआईआर अभियान के दौरान जिन लोगों को ‘अनुपस्थित’ या ‘स्थानांतरित’ (Shifted) के रूप में चिह्नित किया गया था, या जिन्हें पिछले चुनाव के दौरान तकनीकी गड़बड़ी से मतदाता पर्ची नहीं मिली थी, उनका राशन पानी रोक दिया गया है। इनमें से अधिकांश लोग देश के वास्तविक और पात्र नागरिक हैं।”
डिजिटल और नागरिक प्रमाणीकरण पर ओवैसी का बड़ा सवाल
एआईएमआईएम प्रमुख ने वर्तमान वितरण मॉडल की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए पूछा, “किसी भी गरीब नागरिक को राशन या जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना इस बात पर क्यों निर्भर होना चाहिए कि उसका नाम वर्तमान वोटर लिस्ट में अपडेटेड है या नहीं? जब देश में सरकारी स्तर पर नागरिकों के लिए डिजिटल पहचान और अन्य प्रामाणिक डिजिटल प्रमाणीकरण प्रणालियां पहले से ही लागू हैं, तो फिर केवल मतदाता सूची को ही अंतिम निर्णायक कारक क्यों माना जा रहा है?”
जनता के पैसे की योजनाएं, किसी राजकुमार की चैरिटी नहीं
पश्चिम बंगाल सरकार के रवैए पर बेहद सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए ओवैसी ने कहा, “ये सरकारी योजनाएं कोई पुरस्कार या रेवड़ियां नहीं हैं जो केवल मतदाताओं को दी जाएं। ये सभी पात्र और जरूरतमंद नागरिकों का कानूनी अधिकार हैं। सरकार का यह कदम लाभार्थियों का सत्यापन करने जैसा कम और गरीबों की संख्या में कटौती करके सबसे लाचार वर्ग, विशेषकर महिलाओं, अनुसूचित जातियों (SC) और मुसलमानों के लिए जीवन को जानबूझकर मुश्किल बनाने की एक सोची-समझी कोशिश ज्यादा लगता है। राज्य सरकार ऐसे काम कर रही है जैसे ये योजनाएं राजकुमार शुभेंदु अधिकारी की अपनी कोई निजी चैरिटी (दान) हों। ऐसा बिल्कुल नहीं है; ये योजनाएं पूरी तरह जनता के टैक्स के पैसे से वित्त पोषित हैं।”
मंत्री दिलीप घोष ने लगाया था योजनाओं में भारी लूट का आरोप
असदुद्दीन ओवैसी की यह तीखी टिप्पणी पश्चिम बंगाल के कद्दावर मंत्री दिलीप घोष के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर चौतरफा भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। दिलीप घोष ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि टीएमसी अब अपने पतन की ओर बढ़ रही है क्योंकि उसके नेताओं ने ऊपर से नीचे तक केंद्रीय और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं के पैसों की जमकर हेराफेरी की और अकूत काली संपत्ति अर्जित की है। घोष ने दावा किया था कि जनता के पैसे की लूट करने वाले इन सभी भ्रष्ट नेताओं को कानून के शिकंजे में कसकर न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।
कल्याणकारी योजनाओं के लिए नागरिकता पहली शर्त: दिलीप घोष
राज्य की लोकप्रिय ‘लक्ष्मी भंडार’ और ‘अन्नपूर्णा भंडार’ जैसी वित्तीय सहायता योजनाओं का विशेष उल्लेख करते हुए मंत्री दिलीप घोष ने स्पष्ट किया था कि किसी भी सरकारी आर्थिक लाभ को प्राप्त करने की पहली और अनिवार्य शर्त भारतीय नागरिक होना है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि यह कानून उन बांग्लादेशी और पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच है जो वर्षों पहले भारत आ गए थे लेकिन किन्हीं कारणों से अभी तक औपचारिक नागरिकता प्राप्त नहीं कर सके हैं।
घोष ने सभी पात्र शरणार्थियों से अपील की थी कि वे सरकारी लाभों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए सीएए (CAA) के तहत अपना पंजीकरण जल्द से जल्द पूरा करा लें, अन्यथा नियमानुसार गैर-नागरिकों को किसी भी प्रकार के सरकारी कल्याणकारी लाभों की सूची से बाहर कर दिया जाएगा।

