ममता बनर्जी और अरूप रॉय दोनों गुटों के इस्तेमाल पर लगी रोक, नए नाम व सिंबल के साथ लड़ना होगा चुनाव
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद चरम पर पहुंच गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों धड़ों को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने तत्काल प्रभाव से दोनों गुटों द्वारा ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ के इस्तेमाल पर पूर्ण रोक लगा दी है।
किसी भी गुट को मूल नाम और चुनाव चिह्न के उपयोग की अनुमति नहीं चुनाव आयोग के आधिकारिक आदेश के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और ऋतब्रत गुट के अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट में से किसी को भी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का अकेले इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही दोनों में से कोई भी पक्ष पार्टी के आरक्षित चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ का उपयोग नहीं कर सकेगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के दावों का अंतिम रूप से निपटारा होने तक यह अंतरिम व्यवस्था निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए लागू रहेगी।
नए नाम और नए चुनाव चिह्न के साथ लड़ना होगा उपचुनाव इस अंतरिम आदेश के बाद आगामी विधानसभा उपचुनाव में दोनों गुटों की चुनावी राह बदल गई है। आयोग के निर्देशों के तहत अब दोनों पक्षों को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरना होगा। दोनों गुटों को आयोग के समक्ष अपनी पसंद के नए नाम और फ्री सिंबल सूची में से वैकल्पिक चुनाव चिह्नों के विकल्प प्रस्तुत करने होंगे, जिसके आवंटन के बाद ही वे आगामी उपचुनाव में अपने उम्मीदवार उतार सकेंगे।

