‘अस्थायी निर्माण हटाएं, क्या पुलिस को बुलाऊं?’: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती की पीठ की सख्त टिप्पणी
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के जनसेवा केंद्र ‘सेवाश्रय’ को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को कड़ा रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली पीठ ने दक्षिण 24 परगना जिले के फल्ता में ‘सेवाश्रय’ के लिए बनाए गए अस्थायी निर्माणों को तत्काल हटाने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा, “अस्थायी निर्माण को हटा दें। क्या मैं पुलिस को बुलाऊं या राज्य पुलिस को इन्हें हटाने के लिए निर्देश दूं?”
खेल मैदान और उद्यान की जमीन पर कब्जे का आरोप यह मामला फल्ता निवासी अधिवक्ता अमीनुद्दीन खान द्वारा दायर एक याचिका के जरिए अदालत के संज्ञान में आया था। याचिकाकर्ता ने फल्ता बीडीओ (BDO) कार्यालय के पास ‘सेवाश्रय’ के लिए बनाए गए दो अस्थायी ढांचों को तत्काल हटाने की मांग की थी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि जिस स्थान पर यह निर्माण किया गया है, वह स्थानीय खेल मैदान और सार्वजनिक उद्यान (पार्क) की जमीन है।
सार्वजनिक और खेल गतिविधियों पर पड़ा असर याचिकाकर्ता के अनुसार, इस मैदान का उपयोग लंबे समय से स्कूली खेलों, स्थानीय क्रिकेट और फुटबॉल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ विभिन्न सरकारी और सामाजिक आयोजनों के लिए किया जाता रहा है। मैदान पर अनधिकृत रूप से अस्थायी ढांचे खड़े किए जाने से खेल और सामाजिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न हो रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन को सार्वजनिक उपयोग की इस जमीन से अस्थायी निर्माण तुरंत हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

