सिद्धारमैया और जी. परमेश्वर रहे मंच पर मौजूद, संगठन के मुखिया को दूर रखने पर उठे सवाल
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार के 100 दिन का कार्यकाल पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य समारोह के दौरान सत्ता और संगठन के बीच की खींचतान खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बीके हरिप्रसाद ने इस महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम के मुख्य मंच पर आमंत्रित न किए जाने को लेकर तीखी नाराजगी जाहिर की है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, हरिप्रसाद ने सीधे कांग्रेस आलाकमान के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई है, जिस पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य इकाई से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
मुख्य मंच पर नहीं दिखे संगठन के मुखिया
सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए आयोजित इस बड़े जलसे में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर मंच पर अग्रिम पंक्ति में आसीन रहे और उन्होंने जनसभा को संबोधित भी किया। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर होने के बावजूद बीके हरिप्रसाद को मंच पर स्थान नहीं दिया गया। सरकार के इतने बड़े आयोजन में संगठन प्रमुख की गैर-मौजूदगी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच गहरा असंतोष पैदा कर दिया है और राजनीतिक हलकों में गुटबाजी की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
आलाकमान ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
हरिप्रसाद का मानना है कि इस तरह की उपेक्षा प्रोटोकॉल और संगठन के सम्मान के विपरीत है। उन्होंने आलाकमान को अवगत कराया कि सरकार और पार्टी संगठन के बीच सामंजस्य का अभाव भविष्य में पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। आलाकमान द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बाद कर्नाटक कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में हलचल बढ़ गई है और इस विवाद को शांत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

