कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दिल्ली से कोलकाता लौटने से ठीक पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारी राजनीतिक हंगामा देखने को मिला। शुक्रवार को एयरपोर्ट परिसर के भीतर ही टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए।
अभिषेक बनर्जी के स्वागत के लिए हवाई अड्डे पर बड़ी संख्या में तृणमूल समर्थक जमा हुए थे। इसी दौरान वहां भाजपा कार्यकर्ता भी पहुंच गए और दोनों दल आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस धक्का-मुक्की और हिंसक झड़प में तब्दील हो गई, जिससे एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद सीआईएसएफ (CISF) और स्थानीय पुलिस ने तुरंत कड़ा हस्तक्षेप कर स्थिति को विधिक रूप से नियंत्रित किया।
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने की शांति की अपील
इस हिंसक झड़प के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने सार्वजनिक तौर पर शांति बनाए रखने की अपील की:
“कानून को हाथ में न लें कार्यकर्ता” — सुकांत मजूमदार
“मैं सभी नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं से हवाई अड्डे जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों पर शांति बनाए रखने और कानून व्यवस्था पर भरोसा रखने की अपील करता हूं। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का विधिक अधिकार नहीं है। पुलिस को मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।”
क्यों दिल्ली गए थे अभिषेक बनर्जी? समझिए 20 सांसदों की बगावत का विधिक मामला
हवाई अड्डे पर मचे इस बवाल के पीछे का मुख्य कारण टीएमसी के भीतर मची बड़ी राजनीतिक और विधिक हलचल है। अभिषेक बनर्जी शुक्रवार को दिल्ली के एक बेहद महत्वपूर्ण राजनैतिक दौरे से वापस लौट रहे थे।
दिल्ली में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपनी पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता याचिकाएं (Disqualification Petitions) सौंपी हैं।
- बागी गुट का दावा: टीएमसी के इन 20 बागी सांसदों ने पार्टी आलाकमान से नाता तोड़कर एक नए राजनीतिक दल नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में अपने विधिक विलय (Merger) का दावा किया है।
- अभिषेक बनर्जी का विधिक तर्क: लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट किया कि जो सांसद टीएमसी के आधिकारिक चुनाव चिह्न (Symbol) पर चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे हैं, उन्हें पाला बदलने के बाद लोकसभा सदस्य बने रहने का कोई विधिक अधिकार नहीं है।
- सख्त कार्रवाई की मांग: उन्होंने स्पीकर से मांग की है कि इन बागी सांसदों को संसद के भीतर किसी भी तरह की अलग विधायी मान्यता, कार्यालय या संसदीय सुविधाएं न दी जाएं और संविधान की दसवीं अनुसूची (10th Schedule) के तहत उनकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।
इस बड़े दलबदल विवाद के बाद जहां दिल्ली में विधिक लड़ाई तेज हो गई है, वहीं कोलकाता की सड़कों और हवाई अड्डे पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच उपजा यह तनाव आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।

