ठाणे के अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट का मामला; बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश निरस्त, शिवसेना नगरसेवक को झटका
नई दिल्ली/ठाणे: डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई चिकित्सक शारीरिक हिंसा, खुली धमकी या किसी प्रकार के मानसिक दबाव और भय के साये में काम करेगा, तो उससे स्वतंत्र, सटीक और सही चिकित्सीय निर्णय लेने की अपेक्षा बिल्कुल नहीं की जा सकती। अदालत ने यह अहम टिप्पणी ठाणे जिले के डोंबिवली स्थित शास्त्री नगर नगरपालिका अस्पताल में ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों के साथ हुई कथित मारपीट, अभद्रता और गाली-गलौज के मामले में सुनवाई करते हुए की। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे और उनके तीन अन्य सहयोगियों को मिली नियमित जमानत तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है।
उल्लेखनीय है कि चारों आरोपियों पर शास्त्री नगर नगरपालिका अस्पताल में आपातकालीन ड्यूटी कर रहे तीन चिकित्सकों, जिनमें एक महिला डॉक्टर भी शामिल थीं, के साथ हाथापाई, बदसलूकी और जानलेवा दबाव बनाने का गंभीर आरोप है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की दो सदस्यीय पीठ ने रेखांकित किया कि इलाज के नतीजों से असंतुष्टि, अस्पताल प्रबंधन से किसी विशेष मांग को मनवाने या किसी शिकायत को दर्ज कराने के नाम पर डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा, धमकी या दबाव की रणनीति का इस्तेमाल किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा, शांति और सम्मान केवल किसी व्यक्ति विशेष के अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर पूरे समाज और आम जनता के व्यापक हित से जुड़ा हुआ विषय है। चिकित्सकों को मरीजों का सटीक उपचार और जटिल ऑपरेशन करते समय अत्यधिक एकाग्रता, मानसिक शांति और त्वरित निर्णय लेने के स्वतंत्र वातावरण की आवश्यकता होती है। यदि उनके मन में लगातार हिंसा, हमले या जान-माल के खतरे का डर बना रहेगा, तो इसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव समूची स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य कर्मियों के मनोबल और सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 28 सितंबर को आरोपियों को दी गई जमानत के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत के इस कड़े फैसले के बाद शिवसेना नगरसेवक सहित चारों आरोपियों को वापस हिरासत में भेजे जाने का रास्ता साफ हो गया है। इस आदेश को देश भर के चिकित्सा जगत में चिकित्सकों की गरिमा और सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा नजीर माना जा रहा है।

