जून से सितंबर के दौरान 759.4 मिमी वर्षा; पंजाब, असम और मेघालय सहित कई राज्यों में सूखे जैसे हालात
नई दिल्ली: भारत में आधिकारिक तौर पर चार महीने तक चलने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसूनी मौसम बुधवार को समाप्त हो गया। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष देश भर में मानसूनी बारिश का आंकड़ा निराशाजनक रहा और कुल मिलाकर सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बताया कि पूरे सीजन यानी जून से सितंबर माह के दौरान देश में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि वर्ष 2001 के बाद से यह देश में चौथी सबसे कम मानसूनी वर्षा है, जिसने कई कृषि प्रधान क्षेत्रों में चिंताएं बढ़ा दी हैं।
आईएमडी के मुताबिक, इस मानसूनी सीजन में देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में वर्षा के वितरण में भारी असमानता और विसंगति देखने को मिली। कुछ सीमित इलाकों को छोड़कर बड़े भूभाग में बादलों की बेरुखी बनी रही। विशेष रूप से उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में बारिश की कमी का गंभीर असर देखने को मिला।
आंकड़ों के अनुसार, पंजाब, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में मानसून के चारों महीनों—जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर—में लगातार सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई। इन राज्यों में मानसूनी हवाओं की कमजोरी के चलते खरीफ की फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और भूजल स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि वैश्विक जलवायु कारकों और मानसूनी प्रणालियों में आए उतार-चढ़ाव के कारण इस बार वर्षा चक्र में यह बड़ा असंतुलन देखा गया है।

