28.4 C
Mumbai
Thursday, September 24, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

त्योहारों में सड़कों पर डीजे और पटाखों पर बॉम्बे हाईकोर्ट की रोक: ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती, डीआरएम को अवमानना नोटिस

मुंबई-पुणे समेत बड़े शहरों में नियमों के कड़े पालन के निर्देश, वीआईपी लाउंज में खटमल वाले सोफे न बदलने पर नांदेड़ डीआरएम तलब

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आगामी त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों पर तेज आवाज में संगीत बजाने, डीजे चलाने और आतिशबाजी करने को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जनहित, स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक सड़कों पर लाउडस्पीकर, डीजे साउंड सिस्टम, लेजर बीम और पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का सख्त आदेश जारी किया है। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की संयुक्त पीठ ने इस मामले में स्थानीय नागरिक और पुलिस प्रशासन की ढिलाई पर गहरी नाराजगी जताई।

अदालत की पीठ ने ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों को लागू करने में प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव बिना किसी ध्वनि और वायु प्रदूषण के भी पूरी मर्यादा व गरिमा के साथ मनाए जा सकते हैं। उच्च न्यायालय ने मुंबई, ठाणे, पुणे और नासिक जैसे घनी आबादी वाले प्रमुख महानगरों में इन कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने के सख्त निर्देश जारी किए हैं, ताकि आम नागरिकों, बुजुर्गों और मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

इसी बीच, महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन के वीआईपी वेटिंग रूम से जुड़े एक अन्य मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ बेहद सख्त कदम उठाया है। स्टेशन के वीआईपी लाउंज में रखे अत्यंत पुराने और खटमलों से भरे सोफों को बार-बार निर्देश देने के बावजूद न बदलने पर औरंगाबाद जिला एवं सत्र अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट एसएम अहेर ने नांदेड़ के डिवीजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) को कारण बताओ नोटिस जारी कर अवमानना की खुली चेतावनी दी है।

यह पूरा मामला 20 मई का है, जब बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस मंजूषा देशपांडे अपने पति के साथ रेलवे स्टेशन के दौरे पर पहुंची थीं। वहां वीआईपी कक्ष के सोफों की बदहाली और खटमलों की भरमार देखकर उन्होंने स्थानीय न्यायिक मजिस्ट्रेट को सूचित किया था। इसके तुरंत बाद मजिस्ट्रेट ने नांदेड़ के डीआरएम को तत्काल पेस्ट कंट्रोल कराने और सोफे बदलने का औपचारिक निर्देश भेजा था। मजिस्ट्रेट ने टिप्पणी की कि कक्ष की स्थिति इतनी दयनीय है कि हाईकोर्ट के 15 से अधिक न्यायाधीशों को ट्रेन के इंतजार के दौरान वीआईपी रूम के बजाय अपनी कारों में बैठना पड़ता है। चार माह बीतने के बाद भी आदेश का पालन न होने पर इसे अदालती अवहेलना मानते हुए अदालत ने डीआरएम को आगामी 30 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here