NHAI के सिस्टम को चकमा देकर बिना फास्टैग वाले वाहनों से काटी जा रही थी रसीद, 1.03 करोड़ रुपये नकद जब्त
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित टोल प्लाजा में तकनीकी हेरफेर के जरिए चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, देश के करीब 100 टोल प्लाजा पर वाहन चालकों से धोखाधड़ी कर अवैध तरीके से टोल वसूला जा रहा था। इस सुनियोजित सिंडिकेट द्वारा बिना फास्टैग (FASTag) वाले या अपर्याप्त बैलेंस वाले वाहनों को निशाना बनाकर अनधिकृत मोबाइल ऐप के माध्यम से फर्जी रसीदें जारी की जा रही थीं।
एनएचएआई के आधिकारिक सिस्टम से छिपाई गई वसूली ईडी की जांच में पाया गया कि इस पूरे नेटवर्क में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के केंद्रीय सर्वर और सिस्टम को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया था। टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारी ‘मोबडेटा’ और ‘एनी’ जैसे अनधिकृत मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे। इन ऐप के जरिए वाहन चालकों को रसीद तो थमा दी जाती थी, लेकिन वसूली गई रकम का कोई भी रिकॉर्ड आधिकारिक व्यवस्था में दर्ज नहीं होता था। इस समानांतर और अवैध वसूली की निगरानी के लिए अलग से निजी पोर्टल भी संचालित किए जा रहे थे।
उत्तर प्रदेश पुलिस की एफआईआर से खुला मामला इस अंतरराज्यीय फर्जीवाड़े की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित अट्रैला शिव गुलाम टोल प्लाजा से जुड़ी एफआईआर के बाद हुई। जनवरी 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा इस रैकेट का पर्दाफाश किए जाने के बाद मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ईडी ने अपनी जांच शुरू की। जब्त डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में यह नेटवर्क केवल एक प्लाजा तक सीमित न होकर करीब 100 टोल प्लाजा तक फैला पाया गया, जहां करोड़ों रुपये की फर्जी रसीदें काटी जा चुकी थीं।
छह राज्यों में 14 ठिकानों पर छापेमारी, नकदी और लॉकर जब्त जांच एजेंसी ने इस मामले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-एनसीआर में कुल 14 ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान लगभग 1.03 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी, वित्तीय दस्तावेज, बहीखाते और आपत्तिजनक डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। इसके अतिरिक्त आठ बैंक लॉकरों को फ्रीज कर दिया गया है। एजेंसी अब एनएचएआई के बिचौलियों और टोल प्रबंधन से जुड़ी निजी कंपनियों की सांठगांठ की विस्तृत जांच कर रही है।

