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Saturday, August 29, 2026

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संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए CISF और DFI में अहम समझौता: एंटी-ड्रोन तकनीक से लैस होगा सुरक्षा तंत्र

बहरोड़ आरटीसी बनेगा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’, 370 से अधिक महत्वपूर्ण केंद्रों पर हवाई खतरों से सुरक्षा होगी मजबूत

नई दिल्ली: देश के अति-महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (Critical Infrastructure) को आधुनिक हवाई खतरों से सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) ने शुक्रवार को सीआईएसएफ मुख्यालय में एक द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में अत्याधुनिक ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीकों के एकीकरण को और अधिक प्रभावी बनाना है।

सीआईएसएफ अपनी दैनिक सुरक्षा प्रणाली में ड्रोन तकनीक को पहले ही शामिल कर चुका है, जिसके तहत अब तक 3,000 से अधिक जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और बल की 80 से अधिक इकाइयां नियमित निगरानी के लिए इसका सक्रिय उपयोग कर रही हैं।

हवाई खतरों से निपटने वाली नोडल एजेंसी वर्तमान में सीआईएसएफ देश भर के 370 से अधिक संवेदनशील व रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संभाल रहा है, जिनमें प्रमुख हवाई अड्डे, परमाणु संयंत्र, अंतरिक्ष केंद्र और तेल रिफाइनरियां शामिल हैं। इन महत्वपूर्ण केंद्रों पर हवाई खतरों के समाधान के लिए सीआईएसएफ को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में अनाधिकृत या संदिग्ध ड्रोन्स की समय रहते पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को निरंतर उन्नत किया जा रहा है।

आरटीसी बहरोड़ बनेगा ड्रोन उत्कृष्टता केंद्र इस समझौते के तहत सीआईएसएफ के रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर (RTC), बहरोड़ को ‘ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम’ के लिए एक अत्याधुनिक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। डीएफआई भारतीय ड्रोन स्टार्टअप्स और तकनीकी नवाचार कंपनियों के साथ मिलकर बल के लिए व्यावहारिक अनुसंधान (Applied Research) और क्षमता निर्माण में सहयोग करेगा।

सहयोग के मुख्य बिंदु

  • काउंटर-ड्रोन तैनाती: संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और डिप्लॉयमेंट फ्रेमवर्क तैयार करना।
  • स्वदेशी फोरेंसिक प्रणाली: संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों के तकनीकी विश्लेषण और जांच के लिए मजबूत स्वदेशी फोरेंसिक उपकरण स्थापित करना।
  • संयुक्त अभ्यास और रेड-टीमिंग: घुसपैठ करने वाले ड्रोन्स की ट्रैकिंग, पहचान और जवाबी कार्रवाई की तत्परता जांचने के लिए नियमित संयुक्त ड्रिल आयोजित करना।
  • उन्नत प्रशिक्षण मॉड्यूल: तकनीकी चुनौतियों और विभिन्न सुरक्षा परिदृश्यों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और हैकथॉन डिजाइन करना।

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