‘बीमारी भी जानता हूं और इलाज भी’, रक्षाबंधन के कार्यक्रम में वामपंथी छात्र संगठनों पर साधा तीखा निशाना
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय को माओवादी समर्थकों, फलस्तीन समर्थकों और ‘कश्मीर की आजादी’ की मांग करने वालों का सुरक्षित ठिकाना (फ्री ग्राउंड) नहीं बनने देने की सख्त चेतावनी दी है। रक्षाबंधन के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर के बाहर आयोजित भाजपा के ‘वंदे मातरम सामूहिक हस्ताक्षर कार्यक्रम’ को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार परिसर के भीतर की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही है और आवश्यकता पड़ने पर ड्रोन तकनीक के जरिए भी जांच कराई जाएगी।
‘कैसी आजादी चाहिए, गांजा लेने की?’: सीएम का तीखा हमला सीएम शुभेंदु अधिकारी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ असामाजिक तत्व ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ की विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अवंतीपोरा में सुरक्षाबल शहीद होते हैं या पहलगाम में निर्दोष नागरिकों की हत्या होती है, तब विरोध दर्ज नहीं कराया जाता, लेकिन देशहित में पाकिस्तान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाइयों के विरोध में युद्ध-विरोधी रैलियां निकाली जाती हैं। उन्होंने कहा कि वे इस राजनीतिक “बीमारी को भी जानते हैं और इसका सटीक इलाज भी।”
हॉस्टल की दीवारों पर नारों और हिंसा पर जताया विरोध 20 अगस्त को विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लगे प्रतीक चिह्न (लोगो) के क्षतिग्रस्त होने और एबीवीपी व वामपंथी संगठनों (एसएफआई, एआईडीएसओ) के बीच हुई हिंसक झड़पों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कला विभाग के हॉस्टल की दीवारों पर माओवादी कमांडर किशनजी के समर्थन में नारे लिखे जाना असहनीय है। उन्होंने ‘फ्री फिलिस्तीन’ के नारों की जगह ‘फ्री पीओके’ (पाक अधिकृत कश्मीर) का आह्वान करने पर जोर दिया।
‘जेएनयू और उस्मानिया के बाद जादवपुर का नंबर’ देशभर के एबीवीपी कार्यकर्ताओं को संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के जेएनयू और हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रवाद की बहाली के बाद अब जादवपुर विश्वविद्यालय का माहौल भी दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने रेखांकित किया कि जादवपुर एक उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान है और उसकी गरिमा को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के चलते धूमिल नहीं होने दिया जाएगा।

