पणजी (गोवा):
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पणजी जोनल टीम ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और क्रिप्टो-हवाला मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। ईडी ने इस सिंडिकेट के मुख्य वित्तीय मददगार और मनी लॉन्ड्रर निहाल वीएन (निवासी दुबई) को गिरफ्तार किया है।
इस कार्रवाई के साथ ही ईडी का मुख्य फोकस अब सामान्य कूरियर/पैडलर्स के बजाय पूरे ड्रग-ट्रैफिकिंग नेटवर्क, डार्कनेट ऑपरेटरों, सिंडिकेट के सरगनाओं और सीमा-पार से फंडिंग करने वाले फाइनेंसरों को निशाना बनाने पर केंद्रित हो गया है।
28 जुलाई तक ED कस्टडी में भेजा गया आरोपी
निहाल वीएन को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया है। गोवा की विशेष PMLA अदालत ने उसे 28 जुलाई तक 7 दिनों के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।
जांच में सामने आया है कि दुबई में बैठकर काम करने वाला निहाल वीएन अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफियाओं के लिए मुख्य ‘फाइनेंशियल नोड’ था। वह भारत में बिकने वाले अवैध नशीले पदार्थों के कैश को क्रिप्टो-करेंसी और विदेशी मुद्रा में बदलता था। इस लॉन्डर किए गए फंड का इस्तेमाल ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों से हाई-ग्रेड सिंथेटिक ड्रग्स खरीदने के लिए किया जाता था।
7 राज्यों में 26 जगहों पर हुई थी छापेमारी
यह मामला मूल रूप से गोवा पुलिस के एंटी-नारकोटिक्स सेल द्वारा NDPS एक्ट के तहत दर्ज FIR पर आधारित है। ईडी ने जांच के दौरान गोवा, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा और दिल्ली समेत 26 ठिकानों पर छापेमारी की थी।
- छापेमारी के दौरान ₹3 करोड़ नकद, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए थे।
- इस मामले का मुख्य आरोपी मधुपन एसएस पहले ही 17 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया जा चुका है और फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
‘नशा-मुक्त भारत’ के लिए वित्तीय नींव पर वार
ईडी के अनुसार, फोरेंसिक व डिजिटल जांच से कई अवैध क्रिप्टो-वॉलेट्स, विदेशी बैंक खातों और शेल कंपनियों का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसी का उद्देश्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार की वित्तीय नींव (Financial Base) को पूरी तरह ध्वस्त करना और इससे अर्जित संपत्तियों को जब्त कर ‘नशा-मुक्त भारत’ के राष्ट्रीय मिशन को मजबूत करना है।

