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Saturday, June 27, 2026

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भारत में नकली दवाओं पर लगेगा ‘क्यूआर कोड’ का पहरा: स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘अनुसूची H2’ का दायरा बढ़ाया; जानिए नए नियम, फायदे और समय-सीमा

नई दिल्ली: भारत में नकली, घटिया और सब-स्टैंडर्ड दवाओं (Counterfeit Drugs) के अवैध कारोबार और सप्लाई चेन में होने वाली हेराफेरी को पूरी तरह समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक विधिक कदम उठाया है। हाल ही में राजस्थान के कोटा में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के कारण हुई प्रसूताओं की दुखद मौतों और गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुए नमूनों का कड़ा संज्ञान लेते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में एक महत्वपूर्ण विधिक संशोधन किया है।

इस संशोधन के तहत अनुसूची एच2 (Schedule H2) के दायरे का व्यापक विस्तार किया गया है, जिसके तहत अब जीवन रक्षक दवाओं की चार बड़ी श्रेणियों के प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड (QR Code) या बार कोड लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।

1. अनुसूची H2 क्या है और किन दवाओं पर लागू होगा नया नियम?

अनुसूची एच2 ड्रग्स रूल्स, 1945 का वह विशेष विधिक प्रावधान है जिसके तहत दवाओं की पैकेजिंग पर यूनीक कोड (QR/Bar Code) अंकित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दवा के निर्माण से लेकर मरीज तक पहुँचने (सप्लाई चेन) की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक करना है।

अब केवल चुनिंदा 300 ब्रांड्स तक सीमित रहने के बजाय, सरकार ने इसके विधिक दायरे में निम्नलिखित श्रेणियों की सभी दवाओं को शामिल कर लिया है:

  • सभी वैक्सीन (All Vaccines)
  • सभी एंटीमाइक्रोबियल दवाएं (All Antimicrobials / Antibiotics)
  • सभी कैंसर रोधी दवाएं (All Anti-Cancer Drugs)
  • नारकोटिक और साइकोट्रॉपिक दवाएं (All Narcotic & Psychotropic Drugs under NDPS Act, 1985)

2. क्यूआर कोड कहाँ लगेगा और स्कैन करने पर क्या जानकारी मिलेगी?

  • पैकेजिंग स्थान: निर्माताओं को यह कोड दवा के प्राइमरी पैकेज (जैसे ब्लिस्टर स्ट्रिप या शीशी, जिसमें दवा सीधे रहती है) पर लगाना होगा। यदि वहाँ तकनीकी रूप से पर्याप्त जगह नहीं है, तो इसे सेकेंडरी पैकेजिंग (बाहरी कार्टन या बॉक्स) पर प्रिंट किया जाएगा।
  • 9 विधिक सामग्रियां: इस क्यूआर कोड को मोबाइल या स्कैनर से स्कैन करने पर उपभोक्ताओं और नियामक एजेंसियों को निम्नलिखित 9 महत्वपूर्ण जानकारियां तुरंत मिलेंगी:

3. इस ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ व्यवस्था से क्या लाभ होंगे?

  1. प्रामाणिकता की तत्काल जांच: मरीज या फार्मासिस्ट काउंटर पर ही दवा के असली या नकली होने की विधिक व वैज्ञानिक पुष्टि कर सकेंगे।
  2. सप्लाई चेन पर नियंत्रण: कोटा जैसी घटनाओं (जहां खरीद से अधिक दवाएं बाजार में बेची गईं) पर पूरी तरह रोक लगेगी, क्योंकि प्रत्येक बैच की लाइव ट्रैकिंग होगी।
  3. एएमआर (AMR) से लड़ाई: नकली और घटिया एंटीमाइक्रोबियल दवाओं की बिक्री रुकने से देश में बढ़ रहे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (दवाओं के बेअसर होने की समस्या) पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
  4. मजबूत विधिक निगरानी: केंद्रीय और राज्य औषधि नियंत्रण एजेंसियों (CDSCO) को घटिया दवाओं के विनिर्माताओं को पकड़ने में आसानी होगी।

4. विधिक इतिहास और नए नियम लागू होने की समय-सीमा (Timeline)

पहले क्या व्यवस्था थी?

इस व्यवस्था की शुरुआत सबसे पहले 1 अगस्त 2023 को हुई थी, जब सरकार ने देश के शीर्ष 300 सबसे अधिक बिकने वाले दवा ब्रांडों (जैसे डोलो, कैलपोल, कॉम्बीफ्लैम, सैरिडॉन, ऑगमेंटिन, एजिथ्राल, एलेग्रा और थायरोनॉर्म आदि) पर इसे अनिवार्य किया था। इन दवाओं का चयन मूविंग एनुअल टर्नओवर (MAT) यानी पिछले 12 महीनों की कुल विधिक बिक्री के आधार पर किया गया था।

नया विधिक रोडमैप और चरणबद्ध समय-सीमा:

सरकार ने फार्मा उद्योग को तकनीकी तैयारियों के लिए पर्याप्त समय देते हुए निम्नलिखित चरणबद्ध समय-सीमा (Phased Timeline) निर्धारित की है:

दवा की श्रेणी (Category)अनिवार्य क्यूआर कोड लागू होने की विधिक तिथि
सभी वैक्सीन, कैंसर रोधी, और NDPS दवाएं1 जुलाई 2027 से प्रभावी
सभी एंटीमाइक्रोबियल (एंटीबायोटिक) दवाएं1 जुलाई 2028 से प्रभावी

विशेष नोट: हालांकि इसके लिए वर्ष 2027 और 2028 की विधिक समय-सीमा तय की गई है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी दवा निर्माता कंपनियों से आधिकारिक अपील की है कि वे इस तिथि का इंतजार किए बिना, जनहित और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए स्वेच्छा (Voluntarily) से इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू करना शुरू करें।

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