जनसमर्थन और सफलता की उम्मीद खोने पर ऐसे शब्दों का सहारा ले रहा विपक्ष; भाजपा सांसद का आरोप
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस, विपक्षी इंडिया गठबंधन और वामपंथी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए ‘रिजीम चेंज’ (तख्तापलट/व्यवस्था परिवर्तन) और लोकतांत्रिक तरीके से ‘सरकार बदलने’ के बीच का बुनियादी अंतर स्पष्ट किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार घटते जनसमर्थन और चुनावी मैदान में सफलता की उम्मीदें धूमिल होने के चलते हताश विपक्ष अब भारतीय राजनीति में इस तरह के अलोकतांत्रिक शब्दों और विमर्श को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।
भाजपा सांसद ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक परिपक्व लोकतंत्र में चुनाव और मतदान के जरिए जनादेश प्राप्त कर सरकार बदलना एक सामान्य, स्वस्थ और संवैधानिक प्रक्रिया है। इसके विपरीत, किसी भी चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को पर्दे के पीछे रची गई साजिशों, विदेशी हस्तक्षेप, अराजकता या हिंसक संघर्षों के जरिए जबरन गिराने की कोशिशों को अंतरराष्ट्रीय शब्दावली में ‘रिजीम चेंज’ कहा जाता है। उन्होंने अफसोस जताया कि कुछ राजनीतिक ताकतें इस खतरनाक प्रवृत्ति को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का जामा पहनाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि दोनों के अर्थ और इरादे पूरी तरह भिन्न हैं।
सुधांशु त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस और कमजोर पड़ते वामपंथी दलों के सामने चुनावी सफलता की संभावनाएं लगातार समाप्त होती जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता के बीच आधार खो चुके ये दल अब नैतिक रूप से भी कमजोर हो चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने वाले विमर्श को हवा दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय मतदाता बेहद जागरूक है और वह लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाली किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देगा।

