सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ने दायर की याचिका, 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च और आगामी ब्रिक्स सम्मेलन का दिया हवाला
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के अति-संवेदनशील इलाके लुटियंस दिल्ली में किसी भी प्रकार के बड़े जुलूस, मार्च या संगठित प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस की पूर्व अनुमति अनिवार्य करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका ऐसे समय में दाखिल की गई है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में बड़े विरोध मार्च का आह्वान किया है।
किसने और क्यों दायर की याचिका? यह याचिका दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेंद्र सिंह द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में शीर्ष अदालत से गुहार लगाई गई है कि इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के संवेदनशील संवैधानिक व रणनीतिक क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के सार्वजनिक जमावड़े या प्रदर्शन की अनुमति तभी दी जाए, जब आयोजकों ने सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक व वैध अनुमति प्राप्त कर ली हो।
5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च और ब्रिक्स सम्मेलन का हवाला सीजेपी ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पूर्व में 36 दिनों तक आंदोलन किया था। संगठन का आरोप है कि आंदोलन समाप्त कराते समय सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया, जिसके विरोध में उन्होंने 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने का एलान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसे इस प्रस्तावित मार्च के लिए अब तक कोई आधिकारिक अनुमति आवेदन नहीं मिला है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि 12-13 सितंबर को आयोजित होने वाले महत्वपूर्ण ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लुटियंस दिल्ली में किसी भी बड़े जमावड़े को नियंत्रित, स्थगित या उसके स्वरूप में आवश्यक बदलाव किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि यदि किसी प्रदर्शन को अनुमति मिलती भी है, तो वह निर्धारित सीमाओं और पुलिस द्वारा तय शर्तों के दायरे में ही हो।

