अन्य गवाहों के मुकरने के बाद भी पीड़िता की गवाही बनी सजा का आधार; ‘घर दिखाने’ के बहाने की थी दरिंदगी
सांगली: महाराष्ट्र के जत पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक नाबालिग बच्ची के साथ हुई छेड़छाड़ के गंभीर मामले में अदालत ने त्वरित और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी युवक जगदीश चव्हाण (25 वर्ष) को बच्ची के साथ अश्लील हरकत करने और शीलभंग के अपराध का दोषी पाते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 50,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।
मामले के अनुसार, डफलापुर निवासी आरोपी जगदीश चव्हाण पीड़िता के पड़ोस में ही रहता था। उसने पहले बच्ची के साथ घुल-मिलकर उसका भरोसा जीता। इसके बाद एक दिन जब बच्ची बाहर खेल रही थी, तो आरोपी ने ‘बाजू वाला घर दिखाता हूं’ कहकर उसे बहला-फुसलाकर अपने घर के भीतर ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ छेड़छाड़ की। डरी-सहमी बच्ची किसी तरह आरोपी के चंगुल से छूटकर चिल्लाते हुए बाहर भागी और सीधे अपने घर पहुंचकर माता-पिता को आपबीती सुनाई।
पीड़िता के परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी की पहचान की और सीधे जत पुलिस स्टेशन पहुंचकर उसके खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस उप निरीक्षक महेश गायकवाड ने मामले की गहनता से तफ्तीश की और ठोस तकनीकी व फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाकर अदालत में विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया।
न्यायिक सुनवाई के दौरान मामले में उस वक्त नाटकीय मोड़ आया जब कुछ अन्य गवाह कथित तौर पर दबाव में आकर अपनी बातों से मुकर गए। हालांकि, अदालत में पेश हुई नाबालिग पीड़िता ने बिना किसी डर के अपने साथ घटी पूरी घटना का सिलसिलेवार और स्पष्ट विवरण प्रस्तुत किया। अदालत ने पीड़िता की गवाही को अत्यंत सुसंगत, प्रामाणिक और विश्वसनीय मानते हुए अन्य गवाहों के मुकरने के बावजूद आरोपी को दोषी ठहराया और उसे कड़ी सजा सुनाई।

