बुनियादी ढांचा, रक्षा नवाचार, डेटा साझाकरण और एआई के संतुलित उपयोग को लेकर दिए कड़े निर्देश
नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आधिकारिक आवास पर भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश मामलों, सुशासन और बुनियादी ढांचे के भविष्य के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने सचिवों को संबोधित करते हुए कहा कि वे केवल तात्कालिक चुनौतियों और आंकड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि देश के समग्र विकास के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण (Long-term Vision) के साथ काम करें।
विभागों में तालमेल की कमी (साइलो) बड़ी चुनौती
- सोच बदलने का आह्वान: पीएम मोदी ने कहा कि विभागों का अलग-थलग काम करना (साइलो) केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि मानसिकता की समस्या है। अधिकारियों को काम में स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना लानी होगी।
- संकट प्रबंधन का उदाहरण: उन्होंने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट के दौरान मंत्रालयों के बीच देखे गए उत्कृष्ट समन्वय का हवाला देते हुए इसे सरकारी कार्य संस्कृति का स्थायी हिस्सा बनाने पर बल दिया।
- शिक्षा व युवाओं से संवाद: नीति निर्माण में नवाचार लाने के लिए सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता बताई गई।
एआई, डेटा प्रबंधन और रक्षा क्षेत्र में सुधार
| क्षेत्र | प्रधानमंत्री के प्रमुख निर्देश |
| एआई (Artificial Intelligence) | एआई का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, लेकिन अंतिम निर्णय क्षमता और मानवीय विशेषज्ञता का नियंत्रण हमेशा बना रहना चाहिए। |
| डेटा प्रबंधन | डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए विभागीय सीमाओं को तोड़कर डेटा इंटरऑपरेबिलिटी और शेयरिंग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। |
| रक्षा नवाचार | भारतीय रक्षा उद्योग को विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए रक्षा शिक्षा, मानव संसाधन और स्वदेशी अनुसंधान पर विशेष जोर दिया जाए। |
| समुद्री व बंदरगाह विकास | जहाज निर्माण को मिले बुनियादी ढांचे के दर्जे की मिशन मोड में समीक्षा हो और पोर्ट-लेड विकास के जरिए विनिर्माण व निर्यात को बढ़ावा मिले। |

