मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे कार्यकर्ता; कानूनी मदद देने का ऐलान
मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के विरोध में रविवार को महाराष्ट्र की राजनीति में एक दुर्लभ एकजुटता देखने को मिली। शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अमित ठाकरे एक साथ शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। दोनों युवा नेताओं ने पुलिस प्रशासन से हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को अविलंब रिहा करने की पुरजोर मांग की।
मामले के अनुसार, रविवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नागरिक मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में अपनी आवाज उठाने के लिए ऐतिहासिक शिवाजी पार्क मैदान में एकत्रित होने पहुंचे थे। हालांकि, मुंबई पुलिस ने इलाके में धारा और सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति न होने की बात कही। मैदान की ओर बढ़ रहे कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने मौके से हिरासत में ले लिया और उन्हें शिवाजी पार्क पुलिस थाने ले आई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बिना पूर्व आधिकारिक अनुमति के भीड़ जुटाने या प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत यह निवारक कार्रवाई की गई है। वहीं, कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की सूचना मिलते ही आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे अपने-अपने समर्थकों के साथ सीधे थाने पहुंच गए। दोनों नेताओं ने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए पुलिसिया कार्रवाई को असंवैधानिक और दमनकारी करार दिया।
थाने के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताना हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है और सत्ता के इशारे पर विपक्ष व प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाई नहीं जा सकती। उन्होंने हिरासत में लिए गए सभी लोगों को पूरी कानूनी सहायता और कानूनी लड़ाई में साथ देने का भरोसा दिया। दोनों ठाकरे बंधुओं के एक साथ थाने पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई, जबकि एहतियात के तौर पर पुलिस स्टेशन और शिवाजी पार्क इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

