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Tuesday, June 2, 2026

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गुजरात में सरकारी काम कराना हुआ बेहद आसान: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने लागू किया ‘यूनिवर्सल एफिडेविट’, अब हर योजना के लिए नहीं भटकना पड़ेगा

गांधीनगर: गुजरात सरकार ने आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए सोमवार (1 जून 2026) को राज्य में सरकारी सेवाओं की पहुंच को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने पूरे राज्य में एक ‘मानकीकृत सार्वभौमिक शपथ पत्र’ (Universal Affidavit Layout) लागू करने की आधिकारिक घोषणा की है। यह नया नियम और प्रारूप उन सभी सरकारी या प्रशासनिक मामलों में तत्काल प्रभाव से लागू होगा, जहाँ वर्तमान कानूनों या नियमों के तहत शपथ पत्र (Affidavit) जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य है, लेकिन उसका कोई विशेष या पूर्व-निर्धारित प्रारूप उपलब्ध नहीं था।

अलग-अलग शपथ पत्रों के झंझट से मिली मुक्ति; सीएम भूपेंद्र पटेल का बड़ा फैसला

एक आधिकारिक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में नागरिक सेवाओं को सरल, सुगम और डिजिटल बनाने के प्रयासों के तहत राज्य के विधि विभाग (Law Department) ने यह दूरगामी फैसला लिया है। विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि अब तक गुजरात के नागरिकों को विभिन्न सरकारी विभागों की कल्याणकारी योजनाओं, प्रमाण पत्रों और अन्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए हर बार अलग-अलग प्रकार के शपथ पत्र बनवाने और जमा करने पड़ते थे। इस पुरानी व्यवस्था के कारण लोगों को अत्यधिक असुविधा, अनावश्यक देरी, आर्थिक नुकसान और जटिल कागजी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता था। सार्वभौमिक शपथ पत्र लागू होने के बाद अब अलग-अलग शपथ पत्रों की यह बाध्यता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

डिजिटल पोर्टल और जन सेवा केंद्रों पर भी होगा अनिवार्य रूप से लागू

गुजरात सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब पूरे सूबे में केवल एक ही कॉमन प्रारूप का शपथ पत्र मान्य किया जाएगा। नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत इस यूनिवर्सल फॉर्मेट को जिला, तालुका, ग्रामीण और शहरी स्तर के सभी सरकारी कार्यालयों, निगमों, स्थानीय प्राधिकरणों और नागरिक सेवा केंद्रों में अनिवार्य रूप से स्वीकार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ऑनलाइन आवेदन करने वाले युवाओं और नागरिकों की सुविधा के लिए इस प्रारूप को ‘डिजिटल गुजरात पोर्टल’ (Digital Gujarat Portal) और सभी ‘जन सेवा केंद्रों’ पर भी डिजिटल रूप से अपलोड व लागू कर दिया गया है।

जहाँ जरूरत नहीं, वहाँ ‘सेल्फ डिक्लेरेशन’ ही रहेगा मान्य; दो भाषाओं में उपलब्ध

राज्य सरकार ने इस नीति में स्पष्टता लाते हुए साफ किया है कि जिन सरकारी सेवाओं या योजनाओं में कानूनी रूप से नोटरीकृत शपथ पत्र जमा करना अनिवार्य नहीं है, वहाँ पहले की तरह ही स्व-घोषणा (Self Declaration) की सरल प्रक्रिया ही प्रभावी रहेगी। ऐसे सामान्य मामलों में नागरिकों से जबरन शपथ पत्र नहीं मांगा जा सकेगा। नागरिकों की भाषाई सुविधा को ध्यान में रखते हुए विधि विभाग ने इस आधिकारिक यूनिवर्सल एफिडेविट प्रारूप को गुजराती और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समान रूप से तैयार किया है, जिससे कानूनी पारदर्शिता भी बनी रहे।

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