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Saturday, June 6, 2026

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कर्नाटक में कैबिनेट संकट: विभाग आवंटन से नाराज मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे पर सस्पेंस; डीके शिवकुमार बोले- ‘मामला सुलझ गया’

बेंगलुरु: कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के गठन के महज तीन दिन बाद ही मंत्रालयों के आवंटन को लेकर उपजा आंतरिक असंतोष नए मंत्रिमंडल के लिए पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है। बेंगलुरु विकास विभाग न मिलने और प्रमुख व मध्यम सिंचाई (Major and Medium Irrigation) विभाग सौंपे जाने से नाराज वरिष्ठ नेता और मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के एलान से कांग्रेस खेमे में हड़कंप मच गया है। हालांकि, शनिवार को रामलिंगा रेड्डी ने अपने तल्ख तेवरों में थोड़ी नरमी लाते हुए संकेत दिए कि वे अपने इस्तीफे पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले पार्टी आलाकमान और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच चल रही बातचीत के नतीजे का इंतजार करेंगे।

दूसरी तरफ, डैमेज कंट्रोल में जुटे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार सुबह मीडिया को आश्वस्त करते हुए कहा कि रामलिंगा रेड्डी के साथ पैदा हुआ गतिरोध पूरी तरह सुलझा लिया गया है। मुख्यमंत्री ने रेड्डी को अपना पुराना और आत्मीय मित्र बताया।

‘मांगा नहीं, पर मिला आश्वासन पूरा न होने से निराश हूं’

कर्नाटक कांग्रेस के कद्दावर और वरिष्ठ चेहरा माने जाने वाले रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को कैबिनेट पोर्टफोलियो जारी होने के तुरंत बाद अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी थी। शनिवार को पत्रकारों से खुलकर बात करते हुए रेड्डी ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी किसी मुख्यमंत्री के सामने किसी विशेष मलाईदार विभाग या मंत्री पद के लिए लॉबिंग नहीं की है। साल 1993 में जब मैं पहली बार वीरप्पा मोइली सरकार में मंत्री बना था, तब भी मेरी यही स्थिति थी। समस्या किसी विभाग विशेष की नहीं है, बल्कि दुख इस बात का है कि सरकार गठन के वक्त मुझसे जो वादे और आश्वासन दिए गए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया, जिससे मुझे निराशा हुई है।”

सुरजेवाला और डीके शिवकुमार की मैराथन बैठकें; इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार

रामलिंगा रेड्डी ने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के कर्नाटक प्रभारी व महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार इस विवाद को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। सुरजेवाला ने उनसे फोन पर लंबी बातचीत कर अपना इस्तीफा तत्काल प्रभाव से वापस लेने की भावुक अपील की है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

रेड्डी ने अपनी मुलाकातों का ब्यौरा देते हुए कहा कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवकुमार उनके आवास पर आने वाले थे, लेकिन उनकी अनुपस्थिति के कारण दोनों नेताओं के बीच बेंगलुरु के एक होटल में बंद कमरे में मैराथन चर्चा हुई। शनिवार को उन्होंने उन्हीं सभी संवेदनशील बिंदुओं पर रणदीप सिंह सुरजेवाला से भी विस्तृत बात की है। अब मुख्यमंत्री, सिद्धारमैया और सुरजेवाला आपस में बैठकर इन मांगों पर विचार करेंगे, जिसके बाद ही कोई सर्वमान्य रास्ता निकलेगा।

वैकल्पिक मंत्रालय के प्रस्ताव पर साधी चुप्पी; नेतृत्व पर भरोसा

जब मीडियाकर्मियों ने रेड्डी से सीधा सवाल किया कि क्या उन्हें शांत करने के लिए बेंगलुरु विकास विभाग वापस देने या किसी अन्य अतिरिक्त प्रभार (वैकल्पिक विभाग) का प्रस्ताव मिला है, तो उन्होंने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेताओं के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत को सार्वजनिक करना सांगठनिक मर्यादा के खिलाफ होगा।

क्या वे अभी भी अपने इस्तीफे के फैसले पर अड़े हैं? इस सवाल को चतुराई से टालते हुए रेड्डी ने कहा, “अगर मैंने अपना धैर्य खो दिया होता, तो क्या मैं आज इतनी शांति से आपसे संवाद कर रहा होता? मुझे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की सूझबूझ पर पूरा भरोसा है कि वे जल्द ही इस मुद्दे का सम्मानजनक समाधान निकाल लेंगे।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई नवेली डीके शिवकुमार सरकार के शुरुआती दिनों में ही इतने वरिष्ठ नेता की नाराजगी और इस्तीफे का ड्रामा पार्टी की छवि के लिए ठीक नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस आलाकमान हर हाल में रेड्डी को मनपसंद विभाग या अतिरिक्त प्रभार देकर कैबिनेट में बनाए रखने की पुरजोर कोशिश कर रहा है, ताकि विपक्ष को सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाने का कोई मौका न मिले।

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