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Thursday, June 18, 2026

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केरल में राजभवन और सरकार के बीच नया संवैधानिक गतिरोध: योग दिवस की बैठक को लेकर भिड़े राज्यपाल और मुख्यमंत्री; विपक्ष ने कहा— ‘समानांतर सत्ता केंद्र न चलाएं’

तिरुवनंतपुरम: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) की तैयारियों को लेकर केरल की सियासत में राजभवन और राज्य सरकार के बीच एक नया और बेहद गंभीर संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा राज्य सरकार के विभिन्न प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों के साथ सीधे बैठक करने पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने कड़ी और तीखी आपत्ति दर्ज कराई है।

केरल सरकार ने इसे सीधे तौर पर कार्यपालिका के विधिक और कार्यकारी अधिकारों (Executive Powers) का अतिक्रमण माना है। इस विधिक मतभेद के बाद, सरकार ने मुख्य सचिव (Chief Secretary) के माध्यम से राजभवन को एक आधिकारिक पत्र भेजकर अपनी कड़ी असहमति दर्ज कराई है और भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक ओवरलैपिंग से बचने का कड़ा विधिक अनुरोध किया है।

प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन: मुख्यमंत्री कार्यालय की आपत्ति

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी विधिक स्टैंड के अनुसार, निर्वाचित सरकार को इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक की भनक तक नहीं थी और उन्हें इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्टों के जरिए मिली।

  • संवैधानिक मर्यादा: मुख्य सचिव द्वारा राजभवन को भेजे गए विधिक पत्र में स्पष्ट रेखांकित किया गया है कि किसी भी विभाग के सिविल सेवकों या अधिकारियों को सीधे बुलाकर समीक्षा करना पूरी तरह से चुनी हुई सरकार का कार्यकारी क्षेत्राधिकार है।
  • पुनरावृत्ति से बचने की चेतावनी: पत्र में राजभवन से अनुरोध किया गया है कि स्थापित संवैधानिक मर्यादाओं का अक्षरसः पालन किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी किसी असहज विधिक स्थिति की पुनरावृत्ति न हो।

“राज्यपाल समानांतर सत्ता केंद्र की तरह काम कर रहे हैं” — विपक्ष के नेता पिनराई विजयन
इस पूरे विवाद पर केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) पिनराई विजयन ने भी राज्यपाल की कार्यशैली पर कड़े विधिक और राजनीतिक सवाल उठाए हैं। उन्होंने सदन के बाहर संवाददाताओं से कहा: “संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत राज्यपाल को अनिवार्य रूप से मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता (Aid and Advice) पर ही कार्य करना चाहिए। वे सीधे तौर पर नौकरशाही को तलब कर निर्देश नहीं दे सकते। इस मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि राजभवन राज्य के भीतर एक ‘समानांतर सत्ता केंद्र’ (Parallel Power Center) स्थापित करने का प्रयास कर रहा है, जो हमारे देश के संघीय ढांचे (Federal Structure) और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।”

यह कोई औपचारिक बैठक नहीं, केवल संवाद था: राजभवन की विधिक सफाई

चतुर्दिक राजनीतिक और विधिक घिराव के बाद राज्यपाल कार्यालय (राजभवन) ने इस मामले पर अपनी आधिकारिक सफाई पेश की है। मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे गए जवाब में राज्यपाल के सचिव ने स्पष्ट किया कि:

  1. कोई आधिकारिक समन नहीं: विभागीय अधिकारियों को किसी कड़े विधिक एजेंडे या औपचारिक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के लिए राजभवन नहीं बुलाया गया था।
  2. समन्वय का प्रयास: आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ की गरिमा को देखते हुए केवल एक अनौपचारिक संवाद और अंतर-विभागीय समन्वय (Coordination) स्थापित करने का प्रयास किया गया था। राजभवन ने सरकार से अपील की है कि इसे कार्यपालिका के दैनिक कामकाज में हस्तक्षेप के रूप में न देखा जाए।

योग दिवस की आड़ में राजनीतिक रस्साकशी

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, केरल में नई सरकार के गठन के बाद से ही राजभवन और कार्यपालिका के बीच कई विधिक मुद्दों को लेकर रस्साकशी चल रही थी। प्रतिपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल इस अस्थिर राजनीतिक स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य सरकार ने भी कड़े संकेत दिए हैं कि वे अपने विधिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। ऐसे में योग दिवस जैसे सांस्कृतिक और राष्ट्रीय आयोजन की तैयारियां अब पूरी तरह से राज्यपाल-सरकार संबंधों के जटिल संवैधानिक विवाद में तब्दील हो चुकी हैं।

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